खेती-किसानी में बदलती तकनीकें अब किसानों के लिए सुविधा और बचत का नया माध्यम बन रही हैं। सक्ती जिले के मालखरौदा विकासखंड के ग्राम नवागांव के प्रगतिशील किसान रामप्रसाद रात्रे ने नैनो यूरिया (तरल) का सफल उपयोग कर यह साबित किया है कि आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर खेती को अधिक सुविधाजनक और लाभकारी बनाया जा सकता है।
लगभग 4.50 एकड़ कृषि भूमि पर खेती करने वाले रामप्रसाद रात्रे ने पिछले वर्ष अपनी फसलों में नैनो यूरिया का प्रयोग किया। उनका कहना है कि इस नई तकनीक ने न केवल खेती की लागत कम करने में मदद की, बल्कि समय और श्रम की भी उल्लेखनीय बचत कराई। रामप्रसाद बताते हैं कि पहले पारंपरिक यूरिया की 45 किलो की बोरी खरीदना, उसे बाजार से खेत तक पहुंचाना और उसका प्रबंधन करना एक बड़ी चुनौती होती थी। इसके साथ ही फसल सीजन के दौरान यूरिया की उपलब्धता को लेकर भी किसानों को अक्सर परेशानी का सामना करना पड़ता था। कई बार समय पर उर्वरक नहीं मिलने से खेती के कार्य प्रभावित होते थे।
नैनो यूरिया ने इस समस्या का काफी हद तक समाधान किया है। इसकी छोटी शीशी को आसानी से खेत तक ले जाया जा सकता है और आवश्यकता के समय इसका उपयोग भी सरलता से किया जा सकता है। इससे परिवहन की परेशानी नही होती है। किसानों का समय भी बचता है। इसकी उपलब्धता अपेक्षाकृत सहज होने से फसलों को समय पर आवश्यक पोषण मिल पाता है।
श्री रात्रे का कहना है कि नैनो यूरिया उपयोग में आसान होने के साथ-साथ खेती की लागत को नियंत्रित करने और बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में सहायक साबित हो रहा है। उनका मानना है कि बदलते समय के साथ किसानों को नई कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए आगे आना चाहिए, ताकि कम संसाधनों में अधिक उत्पादन और बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सके। उनका कहना है कि खेती में नवाचार और वैज्ञानिक पद्धतियों का समावेश ही किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने का प्रभावी मार्ग है।