पर्यावरण संरक्षण की मुहिम ने दिलाई राष्ट्रीय पहचान
विद्यार्थियों और शिक्षकों के सामूहिक प्रयासों का मिला सम्मान
शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि समाज और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी विकसित करती है। इसका उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, सेमरा ने, जिसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित ‘पर्यावरण चैंपियन अवार्ड 2026’ के लिए चयनित किया गया है। यह उपलब्धि न केवल विद्यालय बल्कि पूरे जिले और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है।
विद्यालय को यह सम्मान पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन, स्वच्छता और सतत विकास के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए विश्व पर्यावरण दिवस, 5 जून 2026 को देहरादून में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में प्रदान किया जाएगा। भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून तथा भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की महत्वपूर्ण ‘नमामि गंगे’ परियोजना के तहत यह राष्ट्रीय सम्मान दिया जा रहा है। विद्यालय ने गंगा की सहायक नदियों के संरक्षण, जल बचाओ अभियान, वृक्षारोपण, स्वच्छता गतिविधियों और पर्यावरण जागरूकता से जुड़े अनेक नवाचारपूर्ण कार्यक्रमों का सफल संचालन किया। इन पहलों में विद्यार्थियों, शिक्षक-शिक्षिकाओं, कर्मचारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी रही, जिसके परिणामस्वरूप संस्था ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई।
स्कूल परिसर को हरित और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने, जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का भाव जगाने के लिए विद्यालय में नियमित गतिविधियां संचालित की जा रही है। वास्तव में पर्यावरण संरक्षण केवल दायित्व नहीं, बल्कि मानवता के भविष्य की सुरक्षा का संकल्प है।