राहुल गांधी समेत कांग्रेस के अन्य नेता अक्सर अदाणी समूह के बढ़ते कारोबार को लेकर मोदी सरकार को घेरते रहते हैं। लेकिन, अदाणी समूह ने कांग्रेस और अन्य गैर-भाजपा दलों के शासन वाले राज्यों में भी तेजी से अपना कारोबार बढ़ाया है।
समूह इन राज्यों में सड़क, बंदरगाह, बिजली, नवीकरणीय ऊर्जा, सीमेंट और डाटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में करीब पांच लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम कर रहा है या उन्हें आगे बढ़ा रहा है।
कांग्रेस शासित कर्नाटक में अदाणी एंटरप्राइजेज बेंगलुरु में हेब्बाल और सेंट्रल सिल्क बोर्ड को जोड़ने वाली प्रस्तावित 16.75 किलोमीटर लंबी सुरंग सड़क परियोजना के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनी है।
अदाणी समूह की कर्नाटक में पहले से मौजूदगी है। इसमें 1200 मेगावाट का उडुपी बिजली संयंत्र और मंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शामिल है। केरल में अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनमिक जोन ने विझिनजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह विकसित किया है।
यह परियोजना पिछली वाम मोर्चा सरकार के समय शुरू हुई थी और कांग्रेस की अगुआई वाली वर्तमान सरकार के कार्यकाल में आगे बढ़ी। समूह तिरुअनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का भी संचालन करता है।
इसने 2025 में कोच्चि में 600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले लाजिस्टिक पार्क की आधारशिला रखी थी। तेलंगाना में कांग्रेस सरकार ने जनवरी, 2024 में अदाणी समूह की कंपनियों के साथ 12,400 करोड़ रुपये के निवेश के लिए चार समझौता ज्ञापन किए थे।
तमिलनाडु में समूह ने 2024 में 42,700 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के लिए समझौते किए थे। ये समझौते तत्कालीन एमके स्टालिन सरकार के समय हुए थे। कांग्रेस उस सरकार को समर्थन दे रही थी।
कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश में अदाणी समूह स्थानीय किसानों, खासकर सेब उत्पादकों के लिए फल आपूर्ति शृंखला विकसित करने में मदद कर रहा है। समूह राज्य में सीमेंट कारोबार भी संचालित करता है।