मुंबई के कामगारों की जद्दोजहद: चिलचिलाती धूप में रोज 8 से 12 घंटे तक मेहनत की अनकही कहानियां…

मुंबई में पिछले कुछ सालों से मॉनसून से पहले लोगों को तेज गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में शहर में कई लोग हैं, जिनके पास इस गर्मी से बचने का कोई विकल्प नहीं है। वे हर रोज रोजाना 8 से 12 घंटे सीधे धूप में बिताते हैं, और अक्सर उनके पास गर्मी से बचने के लिए बहुत कम सुरक्षा होती है।

इसको लेकर महाराष्ट्र सरकार ने बाहर काम करने वाले लोगों के लिए कुछ SOP (मानक संचालन प्रक्रियाएं) जारी की हैं, जिनमें पानी पीने के लिए ब्रेक और काम के समय में बदलाव शामिल हैं, क्योंकि शहरी इलाकों में गर्मी से होने वाले तनाव (हीट स्ट्रेस) को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। डॉक्टरों ने भी चेतावनी दी है कि लंबे समय तक गर्मी और नमी के संपर्क में रहने से डिहाइड्रेशन, थकान, हीट स्ट्रेस और यहां तक कि हीटस्ट्रोक भी हो सकता है।

आइए जानते है ऐसे कुछ पेशेवरों की कहनी, जो इस चिलचिलाती धूप में 8 से 12 घंटे बाहर काम करते है और इस तेज गर्मी से बचने के लिए क्या उपाय कर रहे हैं। इस बातचीत में सबसे पहले मुलाकात हुई प्रेम कुमार से जो कि जोमैटो डिलीवरी पार्टनर है। उन्होंने कहा, “मैं रोजाना 12 से 13 घंटे खाना डिलीवर करता हूं, जिसके बदले मुझे बेसिक सैलरी और टारगेट पूरे करने पर कुछ अतिरिक्त इंसेंटिव मिलते हैं।

सुबह 8 बजे से रोजाना 12 घंटे तक करना पड़ता है काम

मैं सुबह 8 बजे काम शुरू करता हूं। शहर के ट्रैफिक में 12 घंटे से ज्यादा बाइक चलाना हमारे लिए पहले से ही बहुत थकाने वाला काम है। सुरक्षा के लिए हम हेलमेट और पूरी आस्तीन वाली शर्ट पहनते हैं, लेकिन साथ ही, इनसे हमें बहुत पसीना भी आता है; हम खाना लेने और पहुंचाने के मौकों का बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि उस समय हमें कुछ मिनटों के लिए हेलमेट से आजादी मिल जाती है।

इस दौरान हम बीमार नहीं पड़ सकते, क्योंकि हमें छुट्टी नहीं मिलती। इसीलिए लगातार पानी पीते रहना हमारे लिए बहुत जरूरी है। हम अपने साथ पानी की बोतलें रखते हैं; बहुत कम ग्राहक या रेस्टोरेंट हमें पानी देते हैं, इसलिए जब भी मौका मिलता है, हम अपनी बोतलें फिर से भर लेते हैं।”

गर्मी के कारण डिब्बे बहुत ज्यादा गर्म हो जाते हैं

इसके बाद हमारी मुलाकात हुई रोहिदास मेडगे से जो कि डब्बावाला है। उन्होंने कहा, “इस भीषण गर्मी के दौरान, हमारा काम और भी ज्यादा मुश्किल हो गया है। हम चिलचिलाती धूप में साइकिल, हाथ-गाड़ी और लोकल ट्रेनों से पूरे मुंबई में घूम-घूमकर दर्जनों टिफिन बॉक्स पहुंचाते हैं। दोपहर होते-होते, टिफिन के डिब्बे बहुत ज्यादा गर्म हो जाते हैं, और सड़कें भी ऐसी लगती हैं जैसे उनसे आग निकल रही हो।

हमें लगातार पसीना आता रहता है और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए हमें बार-बार पानी पीना पड़ता है, लेकिन आराम करने के लिए हमारे पास बहुत कम समय होता है, क्योंकि ऑफिस में काम करने वाले लोग अपने खाने के लिए हम पर ही निर्भर रहते हैं कि हम उन्हें समय पर खाना पहुंचाएंगे।”

कुत्ता घुमाने के दौरान रखना पड़ता है खास ख्याल

इसी कड़ी में मुंबई के सड़कों पर पेशेवर कुत्ता घुमाने वाले हंसराज यादव ने कहा, “सुबह 8 बजे तक फुटपाथ इतने गर्म हो जाते हैं कि जूतों के तलवे जलने लगते हैं और कुत्ते कुछ ही मिनटों में हांफने लगते हैं। इस भीषण गर्मी में थोड़ी देर टहलना भी जोखिम भरा है। मैं ज्यादा पानी साथ रखता हूं, छायादार जगहों पर बार-बार रुकता हूं और डामर पर चलने से बचता हूं क्योंकि इससे उनके पंजे घायल हो सकते हैं।

कुछ कुत्ते बाहर कदम रखने से मना कर देते हैं, जबकि कुछ सामान्य से बहुत जल्दी थक जाते हैं। ऐसे मौसम में, अगर हम बहुत सावधान नहीं रहे तो एक साधारण सैर भी जल्दी ही एक आपातकालीन स्थिति में बदल सकती है। हमारे लिए अतिरिक्त हाइड्रेशन के लिए पानी और चीनी साथ रखना, टोपी पहनना और ढीले सूती कपड़े पहनना अनिवार्य है।”

भीषण गर्मी में सड़क पर बिताते है दिन 

वहीं, रविराज साठे जो कि ट्रैफिक पुलिस कर्मी है। उन्होंने कहा, “इस भीषण गर्मी में मुंबई के व्यस्त चौराहों पर खड़े रहना बेहद चुनौतीपूर्ण है।

हम सीधी धूप में, वाहनों से निकलने वाली गर्म हवा और डामर से उठने वाली गर्मी के बीच, सड़क पर छह से आठ घंटे बिताते हैं। दोपहर तक तापमान असहनीय हो जाता है।

ट्रैफिक को संभालने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हमें हर समय सतर्क रहना पड़ता है, भले ही हमें चक्कर आ रहे हों या हम थका हुआ महसूस कर रहे हों। इस दौरान हममें से कई लोग पानी की बोतलें साथ रखते हैं, टोपियां पहनते हैं और अपनी गर्दन के चारों ओर गीले तौलिए का इस्तेमाल करते हैं।”

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