लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए परिसीमन विधेयक लाने के मोदी सरकार के प्रयासों पर ब्रेक लगाने के लिए कांग्रेस ने दक्षिण के अपने तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को भी साथ ले लिया है।
कांग्रेस शासित राज्यों केरल, कर्नाटक व तेलंगाना के साथ टीवीके शासित तमिलनाडु ने भी अगले 25 वर्षों तक लोकसभा की सीटें 543 ही रखने तथा इन्हीं सीटों में महिला आरक्षण लागू करने की मांग केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष रखी।
परिसीमन पर कांग्रेस का गेम प्लान
चेन्नई में शाह की अध्यक्षता में हुई दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की बैठक में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बकायदा इस बारे में प्रस्ताव पारित करने की मांग रखते हुए कहा कि जनसंख्या नियंत्रण नीति लागू करने वाले दक्षिण के राज्यों को परिसीमन में दंडित नहीं किया जाना चाहिए।
सरकार तमाम प्रयासों के बावजूद मानसून सत्र में परिसीमन विधेयक के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाई। इसके बावजूद कांग्रेस सतर्क है क्योंकि भाजपा ने अभी प्रयास छोड़ा नहीं है। इसीलिए पार्टी ने दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की बैठक में गृह मंत्री के समक्ष दक्षिणी राज्यों की परिसीमन के विरुद्ध एकजुट आवाज बुलंद करने की रणनीति तय की।
कार्यसमिति की बैठक में अहम फैसला
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बुधवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में हिस्सा लेने आए केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन, कर्नाटक के मुख्यमंत्री शिवकुमार तथा तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने परिसीमन के संदर्भ में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से चर्चा की थी।
इसमें तय हुआ था कि कांग्रेस के तीनों मुख्यमंत्री, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के साथ मिलकर परिषद की बैठक में लोकसभा की वर्तमान संख्या 543 को अगले 25 वर्षों तक फ्रीज कर इसमें ही महिला आरक्षण देने की मांग करेंगे। विदेश यात्रा के कारण रेवंत परिषद की बैठक में शामिल नहीं हुए, मगर तेलंगाना के प्रतिनिधि ने इसमें नुमाइंदगी की।
दक्षिणी राज्यों को लामबंद करने की जरूरत
कांग्रेस नेतृत्व की रणनीति के अनुरूप ही परिषद की बैठक में शिवकुमार ने कहा कि दक्षिणी राज्यों ने आबादी को स्थिर करने की देश की मांग का जवाब अनुशासन और सफलता के साथ दिया है और यह सफलता परिसीमन में उनकी आवाज कमजोर करने की वजह नहीं बननी चाहिए। उन्होंने दक्षिणी राज्यों की मांग संबंधी परिषद में एक प्रस्ताव रखते हुए इसे पारित करने की अपील भी की।
टीवीके नेतृत्व वाली विजय सरकार तमिलनाडु विधानसभा में पहले ही परिसीमन के विरुद्ध सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित कर चुकी है। कांग्रेस का मानना है कि दक्षिण राज्यों के गोलबंद होने से परिसीमन को लेकर भाजपा सरकार की चुनौतियां बढ़ेंगी।
इसके अलावा राकांपा (एसपी) और द्रमुक के परिसीमन का समर्थन नहीं करने को लेकर भी पार्टी आश्वस्त है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि मोदी सरकार के पास लोकसभा में परिसीमन विधेयक पारित कराने के लिए दो तिहाई बहुमत नहीं है, फिर भी वे जोड़-तोड़ का प्रयास नहीं छोड़ेंगे। लिहाजा विपक्ष ऐसे प्रयासों को लेकर सजग है।