‘धर्म परिवर्तन करने वाले आदिवासियों को ST आरक्षण का लाभ न मिले’, वनवासी कल्याण आश्रम की मांग…

अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने कहा है कि मतांतरण देश के लिए एक बड़ा खतरा है और इसने आदिवासी इलाकों पर बहुत बुरा असर डाला है।

इसके कारण गंभीर सामाजिक संघर्ष और विभाजन हुए हैं। उनका कहना है कि संविधान के अनुच्छेद-342 में संशोधन करके मतांतरण से जुड़ी कई समस्याओं का समाधान किया जा सकता है, ताकि इस्लाम या ईसाई मत अपनाने वाले अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लोगों को इस वर्ग के लाभ न मिल सकें। जिस तरह अनुच्छेद-341 के तहत दूसरा मत अपनाने वाले अनुसूचित जाति (एससी) के लोग इस वर्ग के लाभ से वंचित हो जाते हैं।

एक साक्षात्कार में सत्येंद्र सिंह ने कहा कि आरएसएस से जुड़ा वनवासी कल्याण आश्रम मुख्य रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक जागरूकता जैसे क्षेत्रों में काम करता है, लेकिन 2006 में इसने रायपुर में जनजाति सुरक्षा मंच की स्थापना की ताकि एसटी समुदाय के उन सदस्यों को “डीलिस्ट” (एसटी वर्ग से हटाना) किया जा सके जिन्होंने इस्लाम, ईसाई या किसी अन्य गैर-हिंदू मत को अपना लिया है।

कार्तिक ओरांव का किया जिक्र

उन्होंने कांग्रेस के पूर्व सांसद कार्तिक ओरांव का जिक्र किया कि उन्होंने संसद में मतांतरण करने वाले आदिवासियों को एसटी आरक्षण का लाभ मिलते रहने पर चिंता जताई थी। 1969 में सरकार द्वारा गठित एक संयुक्त समिति ने भी प्रस्ताव दिया था कि मतांतरण करने वाले आदिवासियों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए।

1970 में संसद भंग होने के बाद राजनीतिक दबाव में यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। कार्तिक ओरांव का भी दिसंबर, 1981 में निधन हो गया था।केंद्र सरकार के ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताते हुए सत्येंद्र सिंह ने कहा कि इसे स्थानीय आदिवासी समुदायों के साथ सलाह-मशविरा करके लागू करना चाहिए, ताकि इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी के साथ-साथ उनके हितों की भी रक्षा हो सके।

उन्होंने शोम्पेन, जारवा और सेंटिनली जैसी संवेदनशील आदिवासी जनजातियों का भी जिक्र किया और कहा कि वे मुख्यधारा के समाज के साथ सीमित संपर्क रखना पसंद करते हैं और उन्हें सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *