सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अदालत द्वारा पारित एक ‘चौंकाने वाला आदेश’ न्यायपालिका के प्रति लोगों के विश्वास को डगमगा देता है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह टिप्पणी गुजरात राजस्व न्यायाधिकरण के इंचार्ज चेयरमैन को प्रशासनिक अवकाश पर भेजने के लिए गुजरात सरकार को उचित निर्देश देने के आदेश को चुनौती देने के लिए दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान की।
उच्चतम न्यायालय गुजरात हाई कोर्ट के सितंबर 2024 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। हाई कोर्ट ने यह उल्लेख किया था कि गुजरात राजस्व न्यायाधिकरण के तत्कालीन इंचार्ज चेयरमैन ने 2024 में दो एकदम अलग-अलग आदेश पारित किए थे, विशेष रूप से किसी मामले में देरी की माफी के संबंध में।
न्यायाधिकरण के तत्कालीन इंचार्ज चेयरमैन की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा, “जिस तरह उन्होंने (इंचार्ज चेयरमैन) दोनों आवेदनों पर काम किया, वह हमारे अंतरात्मा को झकझोर देता है।”
पीठ ने कहा, “अगर आप कोई गलत आदेश पारित करते हैं तो ऐसा हो सकता है, लेकिन अगर आप कोई चौंकाने वाला आदेश पारित करते हैं तो इससे न्यायपालिका के प्रति लोगों का विश्वास कमजोर होता है।”
उच्चतम न्यायालय ने याचिका पर सुनवाई पर सहमति जताते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि न्यायिक अधिकारी एक सेवानिवृत्त प्रधान व जिला जज हैं, जिनका सेवा रिकार्ड बेदाग है। पीठ ने जब दोनों आदेशों का जिक्र किया तो वकील ने इसे एक त्रुटि बताया।