NEET समेत कई मुद्दों पर आज घमासान, जंतर-मंतर से संसद तक गरमाएगा सियासी माहौल…

नीट पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का आंदोलन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ भले समाप्त हो गया हो मगर विपक्षी दलों ने इसको लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखने के अपने सियासी इरादों के साफ संकेत दे दिए हैं।

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने संसद मार्च के दौरान छात्रों पर पुलिस की कथित बर्बरता को लेकर रविवार को गृहमंत्री अमित शाह को निशाने पर लेते हुए जिस तरह तीखे सवाल दागे हैं उससे स्पष्ट है कि विपक्ष सोमवार को छात्र आंदोलन की तपिश कायम रखने में कसर नहीं छोड़ेगा।

मानसून सत्र में विवादित परिसीमन बिल फिर से लाने की भाजपा की रणनीति तैयारियों के बीच छात्र आंदोलन की तपिश में विपक्षी दलों को सरकार को बैकफुट पर रखने का मौका दिख रहा है।

जाहिर तौर पर विपक्ष सत्र के बाकी बचे तीन हफ्ते के दौरान सरकार को उसके ऐसे राजनीतिक एजेंड़े के लिए गुंजाइश नहीं देना चाहता हैं और छात्रों के खिलाफ पुलिस की ज्यादतियों के मामले की अपनी सियासी संवेदनशीलता है।

विपक्ष के इरादों को भांप रही सरकार ने इसके मद्देनजर ही सोमवार को ही पेपर लीक के खिलाफ नए कठोर बिल को पेश करने की जवाबी रणनीति तय की है।

राहुल गांधी ने गृह मंत्री को लिखा पत्र

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने छात्रों के खिलाफ विपक्ष के आक्रामक तेवरों का रविवार को एक्स पोस्ट पर गृहमंत्री अमित शाह को लिखे अपने पत्र को साझा करने के क्रम में भी दे दिया।

राहुल गांधी ने शनिवार को गृहमंत्री को भेजे इस पत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर “बर्बर हमले” पर पूछा है कि बतौर गृहमंत्री क्या आपने छात्रों के खिलाफ पैलेट गन समेत घातक बल के इस्तेमाल को मंजूरी दी थी? अगर नहीं, तो किसने दी?

दूसरा जो लोग सादे कपड़ों में छात्रों को लाठियों से पीटते हुए दिखे, क्या वे पुलिसकर्मी हैं या वॉलंटियर्स? उनकी तैनाती की अनुमति किसने दी? इन दोनों सवालों को उठाते हुए कांग्रेस नेता ने कहा है कि दिल्ली में तैनात सुरक्षा बल गृहमंत्री के प्रति जवाबदेह हैं, इसलिए उनसे यह सवाल पूछे हैं।

छात्रों पर बर्बर हमले की जवाबदेही तय करने की मांग

राहुल गांधी ने 20 जुलाई को दिल्ली में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बर्बर हमले की जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा है कि हमारे छात्र एक निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे थे।

मगर उनकी बात सुनने की बजाय सुरक्षा बलों ने उन पर अंधाधुंध बल का प्रयोग किया, जिसमें घातक हथियारों और आंसू गैस का इस्तेमाल भी शामिल था। इसमें सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं तथा महिला छात्रों पर पुलिसकर्मियों ने हमला किया जिसमें जानबूझकर उनके निजी अंगों को भी निशाना बनाया गया।

पैलेट गन के इस्तेमाल पर राहुल ने उठाए सवाल

पुलिस कार्रवाई के दौरान छात्रों पर घातक पैलेट गन के चौंकाने वाले इस्तेमाल की बात उठाते हुए राहुल गांधी ने गृहमंत्री से कहा है कि मीडिया रिपोर्टों से साफ है कि कई लोग छर्रे से बुरी तरह से घायल हुए हैं जिनमें एक पत्रकार भी शामिल है।

19 साल के छात्र साहिल लोचब से वे खुद मिले जो अभी भी बहुत दर्द में है और पैलेट गन के छर्रे से उसकी एक आंख की रोशनी जाने का भी खतरा है।

शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन को लोकतंत्र की बुनियाद- राहुल गांधी

शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन को लोकतंत्र की बुनियाद बताते हुए राहुल ने कहा है कि ये सरकार की जिम्मेदारी है कि वो प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा करे और बातचीत के जरिए उनकी शिकायतों का समाधान करे। इस तरह की क्रूर और बर्बर हिंसा लोकतंत्र की हर मर्यादा को तोड़ती है और देश को आक्रोशित करती है।

देश का भविष्य हमारे युवा और छात्र हैं जो आज जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। उनकी आवाज हर हाल में सुनी जाएगी।

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