हिमाचल में हजारों किशोर पढ़ाई से दूर, 14-18 साल के 64 हजार से अधिक बच्चे स्कूल नहीं जा रहे…

हिमाचल प्रदेश ने शिक्षा व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। शून्य नामांकन स्कूलों का युक्तीकरण कर उन्हें समाप्त कर दिया है। एक शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या में भी उल्लेखनीय कमी लाई है।

इसके बावजूद प्रदेश में 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 64,055 किशोरों का स्कूलों से बाहर होना शिक्षा विभाग और सरकार के लिए चिंता का विषय बना है। इनमें से कुछ ने नौवीं व दसवीं के बाद तो कुछ ने 12वीं कक्षा के बाद स्कूल छोड़ दिया है।

22वीं बैठक में इस विषय पर हुई चर्चा

शिमला में शुक्रवार को आयोजित उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की 22वीं बैठक में इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रदेश के सामने सबसे बड़ी चुनौती ड्रापआउट रोकने और किशोरों को स्कूलों में बनाए रखने की है।

64,055 किशोरों में 29,795 लड़के और 34,260 लड़कियां शामिल हैं। कुल पुरुष आबादी के 10.13 प्रतिशत और महिला आबादी के 13.35 प्रतिशत बच्चे शिक्षा से बाहर हैं।

माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर बच्चों को स्कूलों में बनाए रखना चुनौती बना हुआ है। हालांकि हिमाचल की स्थिति पंजाब, राजस्थान और जम्मू कश्मीर से बेहतर है। स्कूल छोड़ने वाले 14 से 18 वर्ष के किशोरों की संख्या पंजाब में 4.24 लाख, जम्मू कश्मीर 85,785, हरियाणा 3.44 लाख, राजस्थान 17.39 लाख, चंडीगढ़ 8596, दिल्ली 1.51 लाख, लद्दाख 2236 और नार्थ जोन में 28,19,966 है। पूरे देश में यह संख्या 2,00,72,909 है।

स्कूल छोड़ने का कारण परिवार की आय बढ़ाने के लिए काम करना

हिमाचल में लड़कों के स्कूल छोड़ने का सबसे बड़ा कारण परिवार की आय बढ़ाने के लिए काम करना है। लड़कियों में घरेलू जिम्मेदारियां, आर्थिक कारण और शिक्षा को आवश्यक न समझना प्रमुख वजह हैं। शिक्षा ढांचे के मोर्चे पर हिमाचल ने उल्लेखनीय सुधार किया है। प्रदेश में जीरो एनरोलमेंट स्कूल नहीं बचा है।

अकेले शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या 3,473 से घटकर 2,964 रह गई है। राजस्थान के बाद हिमाचल उत्तरी क्षेत्र का दूसरा राज्य है जहां सबसे अधिक एकल शिक्षक विद्यालय हैं। परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स में हिमाचल की स्थिति सुधरी है ड्रापआउट रोकने, किशोर बच्चों की स्कूलों में वापसी सुनिश्चित करने और सीखने के स्तर में सुधार पर विशेष फोकस करना होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *