जंगल सफारी के लिए अब आपको बहुत दूर किसी दूसरे राज्य में नहीं जाना पड़ेगा। यह आनंद 26.11 वर्ग किलोमीटर यानी करीब 6,450 एकड़ जंगल में फैली सुखना लेक वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी में मिलेगा। इसके लिए प्रशासन तैयार है।
यहां तेंदुए का परिवार बढ़ रहा है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सर्वे में दो तेंदुए जंगल के कैमरे में ट्रैप हुए हैं। माना जा रहा है कि जंगल में इनका पूरा परिवार है। यहां 132 प्रजाति के पक्षी भी रह रहे हैं।
सुरक्षा की दृष्टि से भले ही एक साल से प्रशासन ने वाइल्डलाइफ ट्रैकिंग पर रोक लगा रखी हो लेकिन जिस प्रकार से सेंक्चुरी में जैव विविधता बढ़ रही है। कई जंगली जानवरों के साथ अब तेंदुए का परिवार बढ़ रहा हैं प्रशासन ट्रैकिंग की जगह जंगल सफारी शुरू करने की योजना बना रहा है।
जंगल में बार्क डियर, जंगली बिल्ली जैसे जानवर भी देखे गए थे। चंडीगढ़ के पूर्व प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने सिंगापुर नाइट सफारी की तर्ज पर चंडीगढ़ में इस तरह की सुविधा पर्यटकों के लिए शुरू करने पर काम करने के निर्देश दिए थे।
इस संबंध में उन्होंने चंडीगढ़ प्रशासन और पंजाब वन्यजीव विभाग को इसकी व्यवहार्यता, स्थान और माॅडल पर काम करने को कहा था।
इसके लिए उन्होंने छतबीड़ जू के अधिकारियों से भी चर्चा की थी। हालांकि, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की विशेषज्ञ टीम ने चंडीगढ़ शहर के भीतर इस परियोजना को उपयुक्त नहीं माना था। इस वजह से जंगल सफारी के विकल्प पर आगे बढ़ने की सोची गई है।
जंगल सफारी से बढ़ेंगे पर्यटक
अगर प्रशासन की योजना धरातल पर उतरती है तो इससे न सिर्फ दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों के वाइल्ड लाइफ में रुचि रखने वाले लोग जंगल सफारी का आनंद ले सकेंगे। बल्कि इससे चंडीगढ़ में टूरिज्म भी और अधिक बढ़ेगा।
अभी तक चंडीगढ़ में आने वाले लोग सुुखना लेक, राॅक गार्डन, म्यूजियम आदि को ही देखने के लिए आते हैं। चंडीगढ़ वैसे भी सभी प्रमुख हिल स्टेशन का ट्रांजिट प्वाइंट है। पहाड़ी चोटियों से वापस आते या जाते समय लोग चंडीगढ़ में रुकते हैं। शापिंग करते हैं। जंगल सफारी शुरू होने से उनका चंडीगढ़ में स्टे बढ़ेगा और आर्थिक रूप से भी इकानामी बढ़ेगी।
जंगल बंद होने से नेचर लवर्स नाखुश
चंडीगढ़ शिवालिक की पहाड़ियों की तलहटी में ही बसा है। ये पहाड़ियां सुखना लेक से दूसरी तरफ बसी वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी से ही शुरू हो जाती हैं। इस सेंक्चुरी में स्थानीय निवासी और पर्यटक पर्यावरण और वन्य जीवों के साथ सुकून भरे पल बिताते थे। इसके लिए फाॅरेस्ट एंड वाइल्डलाइफ डिपार्टमेंट वाइल्ड लाइफ वाक का आयोजन करता था।
इस वाॅक में एडवेंचर ट्रैक होने के साथ हरी भरी पगडंडियों वाला रास्ता, कई वाॅटर बाॅडी और उनके आस-पास मंडराते वन्य जीव भी देखने को मिलते थे। अलग-अलग प्रजाति के पक्षियों, पेड़ों की अलग-अलग किस्मों को करीब से देख पाते थे।
यह ट्रैकिंग नेपली गेट से शुरू होकर कासंल तक होती थी। लेकिन तेंदुए की दस्तक के बाद यह ट्रैकिंग पूरी तरह से बंद है। इससे नेचर लवर्स नाखुश हैं। इन्वायरनमेंट सोसायटी ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी एनके झिंगन ने कहा कि वाइल्डलाइफ के नाम पर पर्यटकों के लिए एक ट्रैकिंग ही थी। वह भी बंद है। प्रशासन को पूरी तरह बंद करने की बजाए नए विकल्पों पर काम करना चाहिए।
सर्वे में यह सब मिला सेंक्चुरी में
- पक्षी: 132 प्रजातियां मिलीं, जिनमें 2 लुप्त होने वाली प्रजाति और 13 साामान्य प्रजातियां शामिल हैं।
- तितलियां: 73 प्रजातियां दर्ज हुईं, येलो आरेंज टिप सबसे ज्यादा पाई गई।
- स्तनधारी: 16 प्रजातियां मिलीं, जिनमें सांभर, नीलगाय, जंगली सूअर और दो तेंदुओं की मौजूदगी दर्ज हुई।
- सरीसृप: 13 प्रजातियां मिलीं, जिनमें सांप, कछुए, मेंढक और छिपकलियां शामिल हैं।
- वनस्पति: 79 पौधों की प्रजातियां दर्ज हुईं, जिनमें 43 पेड़ और 14 झाड़ी प्रजातियां शामिल हैं।