झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी रफ्तार, अगले दो महीनों में सड़कों पर उतरेंगी 443 नई एंबुलेंस…

झारखंड में लगातार सवालों के घेरे में रही 108 एंबुलेंस सेवा को पटरी पर लाने की कवायद तेज हो गई है।

मरीजों को समय पर आपातकालीन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अगले दो माह में 443 एंबुलेंस सड़कों पर उतारने की तैयारी है। इनमें 237 नई एंबुलेंस की खरीद की जाएगी, जबकि लंबे समय से खराब पड़ी 206 एंबुलेंस को मरम्मत कर दोबारा सेवा में लगाया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग ने सभी एंबुलेंस का संचालन नई एजेंसी से कराएगा। एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा बताते हैं कि पूरी खरीदारी अंतिम चरण पर है, इसमें एएलएस एंबुलेंस की खरीदारी की जानी है, जिसमें लाइफ स्पोर्ट लगा होगा।

आज आधुनिक एंबुलेंस की जरूरत है, हालांकि यह एंबुलेंस बड़ी है लेकिन इसमें जो सेवाएं हैं वो मरीजों के लिए लाभप्रद होगा। मालूम हो कि राज्य में वर्तमान में प्रत्येक जिले में औसतन 15-20 एंबुलेंस संचालित हैं, लेकिन इनमें से आधे से अधिक वाहन जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं।

कई एंबुलेंस के दरवाजे टूटे हुए हैं, स्ट्रेचर और बेड खराब हैं, आक्सीजन सपोर्ट सिस्टम काम नहीं कर रहा है, तो कई वाहनों के टायर तक घिस चुके हैं। कई जिलों में एसी बंद रहने और सायरन खराब होने की शिकायतें भी सामने आई हैं।

स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में पाया गया था कि खराब एंबुलेंस और सीमित वाहनों के कारण मरीजों को समय पर सुविधा नहीं मिल पा रही थी। ग्रामीण इलाकों में स्थिति और गंभीर रही, जहां कई बार मरीजों को निजी वाहन या आटो से अस्पताल पहुंचाना पड़ा। कई मामलों में एंबुलेंस देर से पहुंचने के कारण मरीजों की जान तक चली गई।

हर दिन हजारों काल, लेकिन सीमित संसाधन

राज्य में 108 सेवा पर प्रतिदिन हजारों काल आती हैं। सड़क दुर्घटना, गर्भवती महिलाओं, हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और गंभीर मरीजों के लिए यह सेवा जीवनरेखा मानी जाती है, लेकिन वाहनों की खराब स्थिति और तकनीकी दिक्कतों के कारण सेवा प्रभावित हो रही थी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नई एंबुलेंस के आने और पुरानी गाड़ियों की मरम्मत के बाद व्यवस्था में बड़ा सुधार होगा।

कहीं टोचन कर तो कहीं धक्का मार चल रहा एंबुलेंस

चतरा जिले में कई 108 एंबुलेंस वाहन पूरी तरह से खराब हैं, इतना ही नहीं यहां कर्मचारियों को एजेंसी के द्वारा दो माह से वेतन तक नहीं मिल पाया है। झारखंड प्रदेश एम्बुलेंस कर्मचारी संघ ने चतरा जिले में संचालित 108 एम्बुलेंस सेवा की अत्यंत खराब स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

संगठन द्वारा जारी सूची के अनुसार जिले में कुल 17 एम्बुलेंस संचालित हैं, जिनमें अधिकांश वाहन खराब अथवा सीमित रूप से संचालित हो रहे हैं, जिन्हें धक्का मारने के बाद स्टार्ट किया जाता है।

वहीं, देवघर जिले में संचालित 108 एंबुलेंस सेवा की बात करें तो कई एंबुलेंस ऐसी हालत में सड़क पर दौड़ रही हैं, जिन्हें बीच रास्ते में टोचन करके खींचना पड़ता है।

कई एंबुलेंस कबाड़ में बदलने की कगार पर

हाल के निरीक्षण में सामने आया कि कई जिलों में एंबुलेंस लंबे समय से गैराज में खड़ी हैं। कुछ वाहनों के स्ट्रेचर टूटे हैं, तो कई में ऑक्सीजन सिलिंडर और मानिटर तक उपलब्ध नहीं हैं।

कई एंबुलेंस में सफाई की भी खराब स्थिति पाई गई। तकनीकी स्टाफ की कमी और समय पर मरम्मत नहीं होने से हालात बिगड़ते गए।

क्या बदलेगी तस्वीर?

स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि नई एंबुलेंस के संचालन के बाद रिस्पांस टाइम कम होगा और ग्रामीण क्षेत्रों तक सेवा मजबूत होगी। साथ ही खराब वाहनों की नियमित मानिटरिंग और फिटनेस जांच भी कराई जाएगी।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना प्राथमिकता में है, ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।

केस स्टडी-1 : गुमला में डेढ़ घंटे तक नहीं पहुंची एंबुलेंस

गुमला जिले में घायल मरीज के लिए स्वजन ने 108 एंबुलेंस सेवा को फोन किया, लेकिन करीब डेढ़ घंटे तक एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी। इस दौरान मरीज अस्पताल में तड़पता रहा। परिजनों ने आरोप लगाया कि समय पर एंबुलेंस मिल जाती तो मरीज की हालत इतनी गंभीर नहीं होती। घटना का वीडियो और बयान भी सामने आया था।

केस स्टडी-2 : अस्पताल पहुंचने से पहले खत्म हुआ एंबुलेंस का ईंधन

फरवरी माह में एक मामले में मरीज को अस्पताल ले जा रही 108 एंबुलेंस का रास्ते में ईंधन खत्म हो गया। इससे मरीज को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका और उसकी हालत गंभीर हो गई। इस घटना ने राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए थे।

केस स्टडी-3 : खराब एंबुलेंस के कारण मरीजों को निजी वाहन का सहारा

गढ़वा और हजारीबाग समेत कई जिलों में शिकायतें सामने आईं कि 108 एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंच रही या तकनीकी खराबी के कारण बीच रास्ते में बंद हो जा रही है। कई मरीजों को मजबूरी में आटो, बाइक या निजी वाहन से अस्पताल ले जाना पड़ा।

विधायकों व सांसद देते रहे हैं एंबुलेंस

सरकारी अस्पतालों व प्रखंड के अस्पतालों के लिए विभिन्न सांसद व विधायक एंबुलेंस अपने मद से उपलब्ध कराते रहे हैं। लेकिन यह एंबुलेंस सिर्फ अस्पताल के मरीजों के लिए ही उपयोगी रहती है। जबकि 108 एंबुलेंस कहीं भी बुलायी जा सकती है। ऐसे में माननीयों के द्वारा की जा रही सहायता सीमित दिखती है।

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