उत्तर प्रदेश के एक डाक्टर के हाथों सर्जरी के दौरान घोर लापरवाही का मामला सामने आया है।
खराब किडनी की जगह स्वस्थ किडनी निकालने के मामले में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने डाक्टर को लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया और दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया।
आयोग ने इस मामले को चिकित्सा जगत की सबसे घोर लापरवाहियों में से एक बताया है। यह मामला 2012 का है, जब एक महिला की खराब दाईं किडनी की जगह बाईं किडनी निकाल दी गई थी। बाद में महिला की मौत हो गई थी।
एनसीडीआरसी के अध्यक्ष एपी साही और सदस्य भारतकुमार पंड्या की पीठ ने मामले की सुनवाई की और पीडि़त परिवार को दो करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। आयोग ने उत्तर प्रदेश के सर्जन डा. राजीव लोचन को गंभीर चिकित्सा लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया।
NDRC ने क्या कहा?
18 मई के आदेश में एनसीडीआरसी ने कहा, “हमें इस बात में कोई संदेह नहीं है कि यह लापरवाही के सबसे गंभीर रूपों में से एक है। ऐसे बहुत ही कम मामले अदालतों और न्यायाधिकरणों के सामने आते हैं।”
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 56 वर्षीय शांति देवी ने अप्रैल, 2012 में पेट में दर्द होने पर डाक्टर से संपर्क किया था और दाईं किडनी में गंभीर हाइड्रोनेफ्रोसिस का पता चला था। सर्जरी से पहले की मेडिकल रिपोर्ट में पता चला कि दाईं किडनी खराब है। इसके बाद छह मई, 2012 को दाईं किडनी निकालने के लिए सर्जरी की गई।
इसके बाद जून, 2012 में रेडियोलाजिकल जांच और सीटी स्कैन से पता चला कि दाईं किडनी शरीरी में मौजूद है, जबकि स्वस्थ बाईं किडनी गायब। यह उजागर होने के बाद परिवार ने डाक्टर के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू की थी। मामले की सुनवाई के दौरान डाक्टर ने भी स्वीकार किया था कि दाहिनी तरफ चीरा लगाया गया था, लेकिन बाईं किडनी निकाल दी गई थी।