धमतरी : मनरेगा और जल निधि परियोजना का संगम: आजीविका डबरी से बदल रही ग्रामीण आजीविका की तस्वीर…

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने बोथापारा और चनागांव का किया निरीक्षण, मत्स्य पालन आधारित आजीविका मॉडल को बताया ग्रामीण समृद्धि की नई दिशा

जिले की 50 आजीविका डबरियों में मत्स्य पालन विस्तार का लक्ष्य, महिला सशक्तिकरण और किसानों की आय वृद्धि पर विशेष जोर

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, किसानों की आय में वृद्धि करने तथा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में धमतरी जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत निर्मित आजीविका डबरी अब बहुआयामी आजीविका का प्रभावी माध्यम बन रही है। मनरेगा के माध्यम से तैयार जल संरचनाओं को जल निधि परियोजना से जोड़कर मत्स्य पालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त एवं स्थायी आय के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।

इसी क्रम में कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने आज नगरी विकासखंड के ग्राम बोथापारा एवं चनागांव का सघन भ्रमण कर आजीविका डबरियों का निरीक्षण किया। उन्होंने हितग्राही किसानों एवं महिला मत्स्य पालकों से सीधे संवाद कर योजनाओं के क्रियान्वयन, आय में हुए परिवर्तन तथा भविष्य की संभावनाओं की जानकारी ली। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मनरेगा से निर्मित परिसंपत्तियों का अधिकतम उत्पादक उपयोग सुनिश्चित करते हुए उन्हें आजीविका संवर्धन से जोड़ा जाए।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि जल निधि परियोजना के अंतर्गत मनरेगा से निर्मित डबरियों में वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए एबिस कंपनी के साथ समन्वय स्थापित किया गया है। सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत कंपनी द्वारा हितग्राही मत्स्य पालकों को मछली दाना क्रय पर 25 प्रतिशत की विशेष छूट प्रदान की जा रही है, जिससे उत्पादन लागत में कमी और लाभांश में वृद्धि हो रही है।

अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक आजीविका डबरी का मानक आकार 20×20×3 मीटर निर्धारित है। इसमें मत्स्य पालन प्रारंभ करने की अनुमानित लागत लगभग 33 हजार रुपये आती है। लगभग छह माह की वैज्ञानिक देखरेख के बाद तैयार होने वाली मछलियों से हितग्राहियों को लागत की तुलना में लगभग दोगुनी आय प्राप्त होने की संभावना रहती है। वर्तमान में जिले की 16 आजीविका डबरियों में यह मॉडल सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है, जिसे आगामी चरण में 50 गांवों की 50 डबरियों तक विस्तारित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

भ्रमण के दौरान कलेक्टर श्री मिश्रा ग्राम बोथापारा की महिला मत्स्य पालक श्रीमती सावित्री दर्रो के खेत पहुंचे। उन्होंने डबरी निर्माण, मत्स्य पालन की प्रक्रिया तथा उससे प्राप्त आय के संबंध में विस्तृत जानकारी ली। श्रीमती दर्रो ने बताया कि उनके पास लगभग सात एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें वे पारंपरिक रूप से धान की खेती करती हैं। इसके अतिरिक्त उनकी दो आजीविका डबरियों में कतला, रोहू एवं मृगल प्रजाति की मछलियों का पालन किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि उनके पुत्र ओमप्रकाश को आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों का प्रशिक्षण दिलाने के लिए आगामी माह पुरी भेजा जाएगा, जिससे परिवार के साथ-साथ क्षेत्र के अन्य मत्स्य पालकों को भी उन्नत तकनीकों का लाभ मिल सके।

इसके पश्चात कलेक्टर ग्राम चनागांव के प्रगतिशील किसान श्री नारायण सिंह नेताम के खेत पहुंचे। यहां उन्होंने स्वयं डबरी के पानी की गुणवत्ता की जांच कराई तथा मत्स्य पालन की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। श्री नेताम ने बताया कि लगभग पांच एकड़ कृषि भूमि में उन्होंने दो आजीविका डबरियां विकसित की हैं तथा मत्स्य पालन के साथ आम की बागवानी को भी अपनाया है। इस समन्वित कृषि मॉडल से उन्हें वर्षभर अतिरिक्त एवं स्थायी आय प्राप्त हो रही है।

कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि मनरेगा के अंतर्गत निर्मित परिसंपत्तियों का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर सृजित करना भी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आजीविका डबरी, मत्स्य पालन, उद्यानिकी तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों का समन्वित मॉडल अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाया जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण, जल संरक्षण और सतत कृषि विकास को नई गति मिल सके।

उन्होंने यह भी कहा कि शासन की प्राथमिकता है कि ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हों। मनरेगा, जल संरक्षण और मत्स्य पालन का यह अभिनव समन्वय न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा, बल्कि महिला सशक्तिकरण, पोषण सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी दीर्घकालीन मजबूती प्रदान करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *