नीट-यूजी पेपर लीक को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि हम नहीं चाहते थे कि शिक्षा में जो गड़बढ़ लोग हैं, जो पेपर माफिया हैं, उनके षडयंत्र में हमारा एक भी छात्र अपने अधिकार से वंचित हो। इसलिए हमने नीट-यूजी परीक्षा को रद किया।
हम लोकतंत्र में त्रुटिरहित परीक्षा कराने के लिए वचनबद्ध है। साथ ही छात्रों को आश्वस्त करना चाहते है कि नीट-यूजी की 21 जून को दोबारा होनी वाली परीक्षा शत-प्रतिशत त्रुटिरहित (एरर फ्री) होगी। यह हमारा दायित्व है।
नीट-यूजी की 21 जून की परीक्षा शत-प्रतिशत त्रुटिरहित होगी
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान शुक्रवार को जागरण भारत एजुकेशन कानक्लेव के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने नीट-यूजी के पेपर लीक मामले पर उन्हें लांछन सहना पड़ रहा है। इसके बाद भी हम परीक्षा से जुड़ी चुनौती को स्वीकार रहे है।
हमारा दायित्व समस्या पर आंख बंद कर मुंह मोड़ने का नहीं है, बल्कि हमारा दायित्व लोकतंत्र में जिम्मेदारी का है। उन्होंने कहा कि परीक्षा को रद करने से 22 लाख छात्रों को मानसिक यंत्रणा हुई है, लेकिन हम जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकते है।
प्रधान ने इस मौके पर भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा से लेकर नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) तक का जिक्र किया और कहा कि डा सर्वपल्ली राधाकृष्णन, स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी तक ने भारत की शिक्षा प्रणाली की जो नींव रखी, वह आगे ही नहीं बढ़ पायी।
मातृभाषा में शिक्षा पर जोर, नई शिक्षा नीति का समर्थन
70 के दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राजनीतिक कारणों से भारतीय शिक्षा को मैकाले की शिक्षा प्रणाली की ओर मोड़ दिया। इस दौरान उन्होंने मातृभाषा में शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि अब तक यह आठवीं तक ही पढ़ाई जा रही थी, लेकिन अब नौवीं व दसवीं में भी हम दो भारतीय भाषाओं को पढ़ाने जा रहे है।
कुछ लोग इसकी आलोचना कर रहे है, लेकिन मैं उन लोगों से कहना चाहता हूं कि मैं विदेशी भाषाओं के खिलाफ नहीं है। हम चाहते है कि बच्चे पांच विदेशी भाषा सीखें। लेकिन यह सोचना चाहिए कि यह किसे और किस उम्र में सीखना चाहिए। जिन बच्चों को विदेश में व्यापार करना है या विदेश से डील करनी है उन्हें विदेशी भाषाएं सीखनी चाहिए, लेकिन सब पर थोपी नहीं जानी चाहिए।
शिक्षा में सुधार के लिए सरकार व समाज दोनों का साथ आना होगा: प्रधान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान ने कहा कि शिक्षा में सुधार सिर्फ सरकार नहीं कर सकती है बल्कि इसके लिए सरकार व समाज दोनों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि हाल ही में स्कूलों के बेहतर प्रबंधन के एक समिति गठित करने के दिशा-निर्देश जारी किए है।
शिक्षा प्रणाली को डिग्री से काम्पिटेंसी की ओर ले जाना पड़ेगा
प्रधान ने कहा कि हमारी शिक्षा प्रणाली को डिग्री से कॉम्पिटेंसी की ओर ले जाना पड़ेगा। अभी हमारी पीएचडी पेपर सेंट्रिक है, आज समय है कि पीएचडी को प्रोडक्टिविटी के साथ जोड़ने की। उसे मौजूदा ज्वलंत मुद्दे के साथ जोड़ने की। भारत के नौजवानों को अवसर मिलेगा तो वो इन आकांक्षाओं को पूरा कर सकेंगे, हमारी शिक्षा नीति उसी ओर आगे बढ़ रही है। भारत का टेलेंट दुनिया को लीड कर रहा है। हमें स्पष्टता व कौशल दोनों अर्जित करना होगा, तभी हम विश्व में आगे बढ़ पाएंगे। हमें अपना मूल्यांकन जरूर करना चाहिए।
कोचिंग की कुव्यवस्था से बच्चों को निकालने की जरूरत
प्रधान ने कहा कि कोचिंग एक सामाजिक कुव्यवस्था बन चुकी है। बच्चों को इससे बचाने के लिए समाज को आगे आना होगा। यह एक व्याधि है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को अपने बच्चों को अच्छा पढ़ाना चाहिए।
लेकिन यह भी देखना होगा कि बच्चा कोई वस्तु नहीं है। बच्चे से ऐसी कुछ अपेक्षा मत कराए कि वह अपना बैलेंस खो दे। अपने मैट्रिक्स में गड़बड़ा जाए। मानक से परे अनेक लोगों काफी अच्छा काम कर रहे है।