गांव लौटीं SDM श्वेता गुप्ता, स्कूल में हुआ भव्य स्वागत; छात्रों को बताया सफलता का रास्ता…

जनपद के ग्राम मानिकपुर स्थित श्री केएल पब्लिक स्कूल की पूर्व छात्रा कु. श्वेता गुप्ता के यूपी पीसीएस परीक्षा में सफल होने और एसडीएम पद पर चयनित होने पर विद्यालय में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम शनिवार को विद्यालय परिसर में उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ।

मानिकपुर की हैं श्वेता गुप्ता

श्वेता गुप्ता, जो ग्राम मानिकपुर निवासी सुनील गुप्ता की पुत्री हैं, इनकी इस उपलब्धि पर विद्यालय परिवार एवं क्षेत्रवासियों ने गर्व व्यक्त किया। समारोह में वक्ताओं ने कहा कि श्वेता की सफलता संघर्ष और मेहनत का परिणाम है, जो अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।

उज्ज्वल भविष्य की कामना

विद्यालय के प्रबंधक प्रवीन गुप्ता (प्रधान) ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर इतनी बड़ी सफलता हासिल करना गौरव की बात है। प्रधानाचार्य ब्रजेश विक्रम ने छात्र-छात्राओं से श्वेता से प्रेरणा लेकर लक्ष्य निर्धारित कर मेहनत करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में श्वेता गुप्ता को सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। इस दौरान उन्होंने छात्रों को सफलता के टिप्स देते हुए निरंतर प्रयास और आत्मविश्वास को सफलता की कुंजी बताया। 

तीसरे प्रयास में मिली सफलता

तीसरे प्रयास में श्वेता ने यूपीपीएससी परीक्षा में 25वीं रैंक हासिल कर एसडीएम पद पर चयनित होकर अपनी मेहनत को सार्थक किया। हाल ही में घोषित यूपीएससी परिणाम में वह कुछ अंकों से पीछे रह गई थीं, लेकिन उनका लक्ष्य अभी भी आईएएस बनना है और वह इसके लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

चार भाई-बहनों में दूसरे स्थान पर हैं श्वेता

श्वेता गुप्ता चार भाई-बहनों में दूसरे स्थान पर हैं। उनके पिता सुनील गुप्ता बिल्डिंग मटेरियल व्यवसाय से जुड़े हैं, जबकि मां पुष्पा गुप्ता गृहिणी हैं। परिवार में शिक्षा का अच्छा माहौल रहा, जिससे उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली।

उनकी बड़ी बहन शालिनी गुप्ता नेट परीक्षा उत्तीर्ण कर चुकी हैं। छोटा भाई हर्ष गुप्ता बीबीए की पढ़ाई कर रहा है, जबकि सबसे छोटी बहन भूमि गुप्ता स्नातक कर रही हैं।

गांव से ली प्रारंभिक शिक्षा

श्वेता गुप्ता ने अपनी प्रारंभिक से लेकर माध्यमिक शिक्षा गांव स्थित केएल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने एटा के जवाहरलाल नेहरू स्नातकोत्तर महाविद्यालय से स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई पूरी की।

छात्र जीवन के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था और उसी दिशा में निरंतर प्रयास करती रहीं। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी मुख्य रूप से सेल्फ स्टडी के जरिए की।

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