देश में शोध और नवाचार के प्रति बढ़ते रुझान के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान निजी क्षेत्र से भी शोध व नवाचार के क्षेत्र में निवेश करने की वकालत की। साथ ही कहा कि देश में शोध के क्षेत्र में अभी होने वाले निवेश की करीब 70 प्रतिशत राशि सरकार की ओर से दी जाती है।
उन्होंने कहा कि देश में प्रतिभा का कोई कमी नहीं है, सिर्फ जरूरत है कि शोध व नवाचार की प्रक्रिया को अत्याधुनिक बनाया जाए। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान मंगलवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में IIT मद्रास के टेक्नोलॉजी समिट को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार ने शोध व नवाचार के लिए दी जाने वाली वित्तीय मदद में में काफी बढ़ोतरी की है लेकिन इंडस्ट्री का योगदान बढ़ाने की जरूरत है।
शोध सिर्फ एकेडमिक थीसिस तक सीमित न रहे: प्रधान
प्रधान ने कहा कि शोध अब सिर्फ एकेडमिक थीसिस तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे दुनिया के प्रोडक्ट्स और समाधान में बदलना चाहिए। भारत का टैलेंट पूल पहले से ही कई तरह से दुनिया भर में आगे है, लेकिन अब पूरे नवाचार तंत्र में सुधार और अत्याधुनिक बनाने का समय आ गया है।
इस कड़ी में डीप टेक से जुड़े देश के सौ से अधिक स्टार्टअप और उच्च शिक्षण संस्थानों का अगले महीने फ्रांस के नाइस शहर में प्रदर्शन होगा। इस दौरान पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों दोनों ही मौजूद रहेंगे। इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर भारत के शोध व नवाचार से जुड़े कामों को प्रदर्शित करना और निवेश जुटाना है।
2027 तक देश के 10 लाख शिक्षकों को एआई प्रशिक्षण
आईआईटी मद्रास ने इस दौरान बोधन एआई नाम से शिक्षा के एक नए उत्कृष्ट केंद्र की भी घोषणा की। जो शिक्षा मंत्रालय के सहयोग के शुरू किया गया है। इसके जरिए 2027 तक देश के दस लाख शिक्षकों को एआई से जुड़ा प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। शिक्षा मंत्रालय ने स्कूली स्तर से ही बच्चों को एआई पढ़ाने की पहल की है।