एमएसएमई और एयरलाइंस को बड़ी राहत, पांच साल तक बिना गारंटी मिलेगा लोन

पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए सरकार ने एमएसएमई को बिना किसी गिरवी के 2.5 लाख करोड़ रुपए का लोन देने का फैसला किया है। ताकि पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित एमएसएमई आसानी से लोन ले सके और कारोबार को जारी रख सके। इससे रोजगार कटौती को रोकने में भी मदद मिलेगी। हालांकि इस स्कीम के तहत एक सीमा तक गैर एमएसएमई भी लोन सकेंगे।

मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ने इसकी मंजूरी दे दी। कैबिनेट की बैठक में गन्ना किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए गन्ना के फेयर एंड रिम्युनिरेटिव (एफआरपी) मूल्य में बढ़ोतरी करते हुए इसे 365 रुपए प्रति क्विंटल करने का फैसला किया गया।

वहीं, टेक्सटाइल सेक्टर की जरूरत को ध्यान में रखते हुए काटन की उत्पादकता बढ़ाने से जुड़े उपायों के अमल के लिए 5659.22 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई।

एमएसएमई को इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ईसीएलजीएस) के तहत लोन बिना किसी गिरवी के दिए जाएंगे। इस लोन की गारंटी की लागत 18,000 करोड़ रुपए आएगी जिसकी भुगतान सरकार करेगी।

एमएसएमई के अलावा एयरलाइंस कंपनियां भी 5000 करोड़ का लोन इस स्कीम के तहत ले सकेंगी। एयर टरबाइन फ्यूल या हवाई जहाज के ईंधन की कीमत में लगातार हो रही बढ़ोतरी से एयरलाइंस कंपनियों पर भी परिचालन का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

ईसीएलजीएस के तहत सभी प्रकार के एमएसएमई बिना गिरवी वाले लोन ले सकेंगे। गत वित्त वर्ष 2025-26 की अंतिम तिमाही में किसी एमएसएमई की तरफ से खर्च की गई कार्यशील पूंजी का 20 प्रतिशत लोन उस एमएसएमई को इस स्कीम के तहत दिया जाएगा। लेकिन इसकी अधिकतम सीमा 100 करोड़ होगी। अगले साल मार्च तक एमएसएमई ईसीएलजीएस के तहत लोन ले सकेंगे। इस लोन को पांच साल में चुकाना होगा।

पहले साल उन्हें लोन के भुगतान से छूट होगी। एयरलाइंस अधिकतम 1500 करोड़ का लोन इस स्कीम के तहत ले सकेंगी। उन्हें लोन चुकाने के लिए सात साल का समय दिया जाएगा। कोरोना काल में ईसीएलजीएस की शुरुआत की गई थी।

कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए सूचना व प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि गन्ना किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए एफआरपी में 10 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। इससे गन्ना किसानों को एक लाख करोड़ से अधिक का लाभ मिलने की उम्मीद है।

कॉटन की उत्पादकता बढ़ाने के लिए अगले पांच साल में 5659.22 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके तहत काटन उत्पादन से जुड़े रिसर्च से लेकर उच्च तकनीक के इस्तेमाल जैसे उपाय किए जाएंगे।

कृषि मंत्रालय की निगरानी में देश के 14 राज्यों के 140 जिलों में काटन उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। काटन की बढ़ती जरूरतों की पूर्ति के लिए अभी बड़ी मात्रा में कॉटन का आयात किया जाता है। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में सेमीकंडक्टर निर्माण से जुड़ी दो कंपनियों की स्थापना की मंजूरी भी दी गई। दोनों ही प्लांट गुजरात में लगेंगे। इन दोनों यूनिट की स्थापना से प्रत्यक्ष तौर पर 2230 रोजगार निकलेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *