आज के समय में दुनिया तेजी से बदल रही है। भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच सोना फिर से मजबूत और सुरक्षित निवेश के रूप में उभर रहा है।
भारत में इस रणनीति को संभालने का काम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) करता है, जिसने हाल के वर्षों में अपने गोल्ड रिजर्व को तेजी से बढ़ाया है और साथ ही बड़ी मात्रा में सोना विदेशों से वापस देश में लाया है।
भारत के केंद्रीय बैंक RBI के पास कितना सोना है?
मार्च 2026 के अंत तक RBI के पास भारत में कुल 680 मीट्रिक (RBI Boosts Gold Reserves) टन सोना था। यह सितंबर 2025 के 575.8 मीट्रिक टन के मुकाबले काफी ज्यादा है। यानी सिर्फ 6 महीनों में RBI ने करीब 104.2 मीट्रिक टन सोना अपने भंडार में जोड़ा।
यह वृद्धि सामान्य नहीं मानी जाती, क्योंकि इतनी तेजी से गोल्ड रिजर्व बढ़ाना एक बड़ी रणनीतिक योजना का हिस्सा होता है। भारत और विदेश में रखे सोने को मिला दिया जाए तो मार्च 2026 के अंत तक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास 880.52 मीट्रिक टन (RBI Total Gold Reserve) सोना है।
विदेशों से कितना सोना भारत लाया गया?
सिर्फ सोना खरीदना ही नहीं, RBI ने यह भी तय किया कि उसका सोना कहां रखा जाए। साल 2023 से लेकर 2026 के बीच RBI ने लगभग 274 से 280 मीट्रिक टन सोना विदेशों से भारत वापस मंगवाया।
साल 2025 के मध्य में करीब 64 मीट्रिक टन सोना भारत लाया गया। लगभग 100 मीट्रिक टन सोना ब्रिटेन से, खासकर वहां के केंद्रीय बैंक के भंडार से वापस लाया गया।
इसके बाद 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में भी लगातार सोना भारत लाया जाता रहा।
विदेशों में रखा सोना क्यों घटा?
पहले RBI अपना काफी सोना विदेशों में रखता था। लेकिन अब इसमें कमी आई है। विदेशों में रखा सोना 290.4 मीट्रिक टन से घटकर 197.7 मीट्रिक टन रह गया। यानी करीब 93 मीट्रिक टन की कमी आई है। यह दिखाता है कि RBI अब अपना ज्यादा सोना देश के अंदर ही रखना चाहता है।
सोना एक ऐसा संसाधन है, जिसमें किसी दूसरे देश या संस्था पर निर्भरता नहीं होती। इसे “नो काउंटरपार्टी रिस्क” कहा जाता है। यानी अगर सोना अपने देश में है, तो उस पर किसी बाहरी संकट या प्रतिबंध का असर नहीं पड़ता।
विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की बढ़ती हिस्सेदारी
भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में भी सोने का महत्व बढ़ रहा है। पहले यह हिस्सेदारी करीब 13.9% थी, जो अब बढ़कर 16.7% हो गई है। इसकी वजह है:सोने की वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी और RBI द्वारा लगातार सोना खरीदना।
सरल शब्दों में कहें तो भारत सिर्फ सोना जमा नहीं कर रहा, बल्कि उसे रणनीतिक तरीके से व्यवस्थित भी कर रहा है। RBI का यह कदम देश की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। ज्यादा सोना, और वह भी देश के अंदर—यह भारत की वित्तीय स्वतंत्रता और स्थिरता दोनों को मजबूत करता है।