सोमवती अमावस्या पर मिथुन संक्रांति का दुर्लभ संयोग, इस शुभ मुहूर्त में स्नान-दान से मिलेगा विशेष पुण्यफल…

वैदिक पंचांग के अनुसार, 15 जून को सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी। यह अमावस्या बेहद खास मानी जा रही है, क्योंकि यह अधिक मास में पड़ रही है। अमावस्या तिथि के दिन सोमवार होने के कारण यह सोमवती अमावस्या के रूप में मनाई जाएगी।

अमावस्या के दिन सूर्य देव वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya 2026) के दिन मिथुन संक्रांति भी मनाई जाएगी।

यह एक बेहद शुभ संयोग बन रहा है। सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव की पूजा-अर्चना और पितरों की शांति के लिए तर्पण करने का विधान है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और दान करना शुभ माना गया है। इससे अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। सोमवती अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 2 मिनट से लेकर 04 बजकर 43 मिनट तक रहेगा, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं सोमवती अमावस्या का शुभ मुहूर्त समेत आदि जानकारी के बारे में।

सोमवती अमावस्या 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Somvati Amavasya 2026 Date and Shubh Muhurat)

वैदिक पंचांग के अनुसार, अधिक मास में सोमवती अमावस्या 15 जून को मनाई जाएगी।
अमावस्या तिथि की शुरुआत- 14 जून को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर
अमावस्या तिथि का समापन- 15 जून को सुबह 8 बजकर 23 मिनट पर

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 02 मिनट से लेकर 04 बजकर 43 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 54 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 07 बजकर 19 मिनट से लेकर शाम 07 बजकर 39 मिनट तक
अमृत काल- सुबह 11 बजकर 28 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक

सूर्य वृषभ राशि में करेंगे प्रवेश

अभी सूर्य वृषभ राशि में विराजमान हैं। 15 जून को दोपहर 12 बजकर 49 मिनट पर सूर्य राशि मिथुन में प्रवेश करेंगे। इसलिए इस दिन मिथुन संक्रांति मनाई जाएगी।

सोमवती अमावस्या पर क्या करें?

  • सोमवती अमावस्या के दिन स्नान, दान और पूजा-अर्चना करने का अधिक महत्व है। यह दिन पितरों की शांति के लिए शुभ माना जाता है। सोमवती अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे साधक को सभी पापों से छुटकारा मिलता है और शुभ फल की प्राप्ति होती है।
  • पितरों की आत्मा की शांति के लिए सोमवती अमावस्या के दिन जल में काले तिल मिलाकर पितरों को अर्पित करें। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार के सदस्यों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • इसके अलावा इस दिन पीपल के दिन पेड़ की पूजा-अर्चना का खास महत्त्व है। अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की जड़ में जल अर्पित कर दीपक जलाएं। इसके बाद 108 बार परिक्रमा लगाएं। इससे साधक के जीवन में आने वाले सभी दुख दूर होते हैं।
  • स्नान करने के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें।
  • शिवलिंग का अभिषेक करें।
  • भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते अर्पित करें।
  • पीपल के पेड़ की पूजा करें।
  • मंदिर या गरीब लोगों में अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करें।

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