महेंद्रगढ़ को जिला मुख्यालय तथा नारनौल को अलग जिला बनाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने रविवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नाम एक लिखित पत्र भेजा। संगठनों का कहना है कि हरियाणा सरकार प्रदेश में लगभग एक दर्जन नए जिले बनाने की योजना पर कार्य कर रही है। ऐसे में उनकी मांग को भी मंजूर किया जा सकता है।
समिति सौंपेगी सरकार को रिपोर्ट
सामाजिक कार्यकर्ता रामनिवास पाटोदा व विभिन्न संगठनों के लोगों ने बताया कि हरियाणा सरकार प्रदेश में लगभग एक दर्जन नए जिले बनाने की योजना पर कार्य कर रही है। इसके लिए सरकार ने विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार की अध्यक्षता में चार सदस्यीय मंत्रिमंडलीय समिति का गठन किया है।
समिति में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा, राजस्व मंत्री विपुल गोयल तथा कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा शामिल हैं। यह समिति आगामी समय में जिला, उपमंडल, तहसील तथा अन्य प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन को लेकर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
संगठनों ने क्या की है मांग?
पत्र में मांग की गई है कि महेंद्रगढ़ को जिला मुख्यालय बनाने के साथ-साथ नारनौल को अलग जिला घोषित किया जाए। सामाजिक संगठनों का कहना है कि फिलहाल जिन संभावित नए जिलों की चर्चा हो रही है, उनमें गोहाना, डबवाली, असंध, मानेसर, पिहोवा, पटौदी, बरवाला, सफीदों, नारायणगढ़, रतिया और बहादुरगढ़ के नाम सामने आ रहे हैं, जबकि महेंद्रगढ़ की वर्षों पुरानी मांग को नजरअंदाज किया जा रहा है।
भाजपा सरकार पर महेंद्रगढ़ की उपेक्षा का आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में महेंद्रगढ़ क्षेत्र की लगातार उपेक्षा हो रही है। क्षेत्र के लोगों ने हमेशा भाजपा का साथ दिया है, लेकिन इसके बावजूद अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं आज तक धरातल पर नहीं उतर सकीं।
इनमें खुडाना में आईएमटी, महेंद्रगढ़ बाईपास, किसान मॉडल स्कूल, बिजली ट्रांसफार्मर वर्कशाप, रोडवेज सब डिपो, माधोगढ़ किले को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना, नगरपालिका को नगर परिषद का दर्जा देना, दादरी-महेंद्रगढ़-नारनौल-अलवर रेल लाइन तथा केंद्रीय विश्वविद्यालय में मेडिकल काॅलेज जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
किस विधानसभा में कितनी है आबादी?
सामाजिक संगठनों का कहना है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय होने और शिक्षा का प्रमुख केंद्र होने के बावजूद विद्यार्थियों व आम लोगों को प्रशासनिक कार्यों के लिए नारनौल जाना पड़ता है। यदि महेंद्रगढ़ को जिला मुख्यालय बनाया जाता है तो लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
महेंद्रगढ़ जिले की चारों विधानसभा सीटों अटेली (1,91,736 मतदाता), महेंद्रगढ़ (1,98,194), नारनौल (1,41,841) और नांगल चौधरी (1,53,882)में बड़ी संख्या में मतदाता हैं। इसके बावजूद अहीरवाल क्षेत्र के किसी भी विधायक को पुनर्गठन समिति में शामिल नहीं किया गया, जिससे क्षेत्र में रोष व्याप्त है।
लगभग 100 दिनों तक धरना दिया
सामाजिक संगठनों ने याद दिलाया कि इससे पहले व्यापार मंडल के प्रधान सुरेंद्र बंटी के नेतृत्व में बाजार बंद रखकर आंदोलन किया गया था। अधिवक्ताओं ने भी लगभग 100 दिनों तक धरना दिया था तथा ग्राम पंचायतों और सामाजिक संस्थाओं ने भी इस मांग का समर्थन किया था। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हुआ था, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
आंदोलन करने की दी चेतावनी
भाजपा विधायक कंवर सिंह यादव ने भी विधानसभा में महेंद्रगढ़ को जिला मुख्यालय बनाने का मुद्दा उठाया था। सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस बार भी क्षेत्र की मांगों की अनदेखी की तो जनता में बढ़ रहा असंतोष आगामी समय में बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।