सोशल मीडिया अब सिर्फ कनेक्शन का जरिया नहीं रहा। यह अपराध का ट्रिगर, टूल और मंच तीनों बन गया है। राजधानी दिल्ली में सोशल मीडिया ट्रोलिंग के बाद युवाओं के आपराधिक वारदातों को अंजाम देने का ट्रेंड डरा रहा है।
ताजा मामला बाहरी दिल्ली के पश्चिम विहार का है जहां पिछले हफ्ते सोशल मीडिया में आए एक कमेंट पर शुरू हुई बहस 18 साल के लड़के की हत्या में बदल गई। पुलिस के मुताबिक, इस वारदात में 8-10 लोग शामिल थे।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट्स, कमेंट्स या डायरेक्ट मैसेज में शुरू होने वाले विवाद अब आपराधिक वारदातों में तब्दील हो रहे हैं। विशेषज्ञ इसे ‘परफॉर्मेटिव क्राइम’ की बढ़ती प्रवृत्ति कहते हैं। इसमें अपराधी सोशल मीडिया के जरिए ध्यान, वैलिडेशन या कुख्याति हासिल करना चाहते हैं।
क्राइम के नए ट्रेंड पर क्या बोले एक्सपर्ट?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि लाइक्स, फॉलोअर्स और ऑनलाइन पहचान की होड़ अब अपराध की नई वजह बन रही है। इस साल शालीमार बाग में एक युवक ने हत्या के बाद वीडियो बनाकर अपलोड किया।
जनवरी में मौजपुर में हत्या के कुछ घंटे बाद आरोपी ने सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी ली। फरवरी में सदर बाजार में शादी की पोस्पर कमेंट को लेकर चाकू से हत्या हुई। शास्त्री नगर में बहन की फोटो डालने पर पांच नाबालिगों ने एक व्यक्ति पर हमला किया। ये नया ट्रेंड खासकर युवा अपराधियों में देखा जा रहा है।
टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में साइकोलॉजिस्ट सोनाली मंगल कहती हैं, “युवाओं के फैसले अब इस सवाल से तय हो रहे हैं – क्या यह वायरल होगा? क्या फॉलोअर्स बढ़ेंगे?” दिमाग का रिवॉर्ड सिस्टम लाइक-कमेंट से तुरंत एक्टिव हो जाता है।
किशोरों पर असर ज्यादा है क्योंकि उनका दिमाग 20 की उम्र तक पूरी तरह विकसित नहीं होता। उन्हें तारीफ की लत लग सकती है। ज्यादा ध्यान पाने के लिए लोग खतरनाक काम करने को मजबूर हो जाते हैं।
मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट मिताशी पवार के अनुसार, हिंसक कंटेंट बार-बार देखने से आक्रामकता सामान्य लगने लगती है। इसी वजह से ‘परफॉर्मेटिव क्राइम’ बढ़े हैं – जहां लोग हथियार लहराते, धमकी देते या अपराध कबूल कर वीडियो बनाते हैं। इसका मकसद सिर्फ डराना नहीं, बड़ी ऑनलाइन पहचान बनाना भी है।
लाइक, शेयर और किल
ऑनलाइन विवाद, ऑफलाइन हिंसा
कमेंट्स, डीएम या सोशल मीडिया पोस्ट पर शुरू हुई बहस अब सड़कों पर हिंसा में बदल रही है, जिसाके कई बार जानलेवा नतीजे हो रहे हैं।
प्रदर्शन के लिए अपराध
विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ अपराधी ध्यान या प्रसिद्धि पाने के लिए सोशल मीडिया पर अपने अपराधों को प्रचारित करते हैं।
डिजिटल बदनामी, असली दुश्मनी
ऑनलाइन गालियां, ट्रोलिंग और स्टेटस वॉर वास्ततिक जीवन में हमले, गैंगवार और बदले की वारदातों को जन्म दे रहे हैं।
धमकी और डर फैलाने का माध्यम
आरोपी अवैध हथियारों, गैंग संबंधों और धमकियों को ऑनलाइन दिखाकर लोगों में भय और प्रभाव बनाते हैं।
कबूलनामे और डींगे
कई मामलों में आरोपी अपने अपराधों के वीडियों या पोस्ट खुद सोशल मीडिया पर अपलोड करते हैं और डींगे मारते हैं।
लोकप्रियता की होड़ बना मकसद
फॉलोअर्स, लाइक्स और ऑनलाइन लोकप्रियता की होड़ कई बार डिजिटल प्रतिष्ठा का कारण बनती है, जो हिंसक अपराधों को ट्रिगर कर देती हैं।
सबूत और हथियार दोनों बना स्मार्टफोन
स्मार्टफोन अब सिर्फ कम्युनिकेशन का साधन नहीं, बल्कि अपराध का सबूत, मोटिव, ऑपरेशन और घटनास्थल तक पहुंचने का माध्यम बन चुका है।