एक संसदीय समिति ने केंद्र सरकार के प्रमुख ग्रामीण ब्राडबैंड कार्यक्रम भारतनेट की खामियों को उजागर किया है। साथ ही सभी ग्राम पंचायतों में इसकी राह में आ रही बाधाओं की पहचान करने और कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए राज्यवार एवं क्रियान्वयन मॉडलवार व्यापक परफारमेंस आडिट की मांग की है।
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी पर स्थायी समिति ने डिजिटल भारत निधि पर अपनी 32वीं रिपोर्ट में कहा कि भारतनेट के तहत काफी बुनियादी ढांचा बनाया गया है, लेकिन कार्यशील (आपरेशनल) ग्राम पंचायतों की संख्या कार्यक्रम के तहत निर्धारित कवरेज से कम है।
दूरसंचार विभाग द्वारा समिति को दी गई जानकारी के अनुसार 28 फरवरी, 2026 तक देशभर में लगभग 2.64 लाख ग्राम पंचायतों में से सिर्फ 78,899 में भारतनेट प्वाइंट्स आफ प्रिजेंस (पीओपी) कार्यशील थे। एक पीओपी असल में एक लोकल नेटवर्क प्वाइंट होता है, जिससे घरों, संस्थानों एवं अन्य यूजर्स तक ब्राडबैंड कनेक्टिविटी को बढ़ाया जा सकता है