PoK में विरोध प्रदर्शनों की खबरों पर पाकिस्तान का शिकंजा, कई वेबसाइट्स ब्लॉक…

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में चल रही अशांति की बड़े पैमाने पर मीडिया कवरेज के बाद पाकिस्तान ने कई न्यूज वेबसाइट्स रोक लगा दी है और डिजिटल सेंसरशिप बढ़ा दी है।

न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय और क्षेत्रीय न्यूज वेबसाइट्स को ब्लॉक करने की खबरों के साथ-साथ पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में यूजर्स के लिए इंटरनेशनल ब्रॉडकास्टर्स तक पहुंच भी बंद हो गई है।

किन वेबसाइट्स पर लगाई गईं पाबंदियां

ये पाबंदियां उन प्लेटफॉर्म्स पर लगाई गई हैं जो पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में हालिया विरोध-प्रदर्शनों, कथित सुरक्षा कार्रवाई और लोगों में बढ़ते असंतोष को कवर कर रहे हैं। हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन पाबंदियों की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है।

24 जून के अदालती आदेश के अनुसार, जिन चैनलों को ब्लॉक किया जा सकता है उनमें पाकिस्तान की मुख्य विपक्षी पार्टी, उसके नेता और जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से जुड़े चैनल, साथ ही सरकार की आलोचना करने वाले कई पत्रकार शामिल हैं।

कई यूट्यूब चैनल भी हुए ब्लॉक

इससे पहले जुलाई में अल जजीरा ने रिपोर्ट दी थी कि इस्लामाबाद की एक न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने पाकिस्तान की नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NCCIA) की 2 जून की रिपोर्ट के आधार पर कई यूट्यूब चैनलों को ब्लॉक करने का आदेश दिया था।

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल अधिकारों के लिए काम करने वाले समूहों ने चेतावनी दी है कि प्रस्तावित प्रतिबंधों से पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की आजादी और सीमित हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि टेलीविजन और प्रिंट मीडिया पर भारी पाबंदियों के बीच सोशल मीडिया ही सार्वजनिक बहस और असहमति जाहिर करने के कुछ बचे हुए मंचों में से एक है।

ब्रॉडकास्टर ने यह भी बताया कि यूट्यूब ने 27 कंटेंट क्रिएटर्स को सूचित किया है कि अगर वे कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं करते हैं तो उनके चैनल ब्लॉक किए जा सकते हैं। ये प्रतिबंध पीओके में राजनीतिक हालात और स्थानीय विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी जानकारी के प्रसार को लेकर बढ़ी हुई संवेदनशीलता के बीच लगाए गए हैं।

पीओके में चुनावी प्रक्रिया को लेकर चिंता

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में चुनाव के दूसरे चरण में बड़े पैमाने पर व्यवधान, लॉजिस्टिकल चुनौतियां और लगातार विरोध-प्रदर्शन देखने को मिले, जिससे चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर नए सिरे से चिंताएं पैदा हो गई हैं।

21 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ, जिनमें पीओके के मुजफ्फराबाद डिवीजन के नौ और पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में स्थित शरणार्थियों के 12 निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे। कई निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान में बाधा आई। सड़क जाम और विरोध-प्रदर्शनों के कारण मतदान केंद्रों तक पहुंचना मुश्किल हो गया और चुनाव प्रक्रिया में देरी हुई।

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