सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के पीपावाव पोर्ट के विस्तार के खिलाफ दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया है। जानकारी के अनुसार, याचिका में पर्यावरण मंजूरी में खामियां जताई गई थी। कोर्ट ने सोमवार को याचिकाकर्ता से सवाल पूछते हुए कहा, आप हमें एक भी ऐसी परियोजना बताइए जहां इन पर्यावरणविदों की ग्रीन लॉबी ने विरोध न किया हो।
सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा, बुनियादी ढांचे के बिना देश का विकास नहीं हो सकता। पर्यावरणविद चेतन कुमार नविनत्रे व्यास की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनीता शेनॉय ने तर्क दिया कि यह परियोजना एक दशक से अधिक समय से रुकी हुई है और अब समुद्री स्तनधारियों, ऑलिव रिडले कछुओं, पक्षी प्रजातियों और मैंग्रोव पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों पर विचार किए बिना इसको मंजूरी दे दी गई है।
कोर्ट ने रिपोर्ट में आशंकाओं को निराधार पाया
मामले की सुनवाई कर रहें सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट में आशंकाओं को निराधार पाया गया था और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी पोर्ट के विस्तार को हरी झंडी देते हुए अपने विचार प्रस्तुत किए थे।
बेंच के सामने एडवोकेट अनीता शेनॉय ने इस बात पर जोर देना जारी रखा कि एनजीटी ने ईआईए रिपोर्ट में कई खामियों पर विचार नहीं किया। सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि देश की प्रगति के लिए बंगरगाह का विस्तार जरूरी है।
कोर्ट ने आगे कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं कि पर्यावरण भी जरूरी है, लेकिन आप हमें बताइए कि गुजरात की जगह और कहां बड़े बंदरगाह का निर्माण किया जा सकता है। आप पर्यावरण के नाम पर सब कुछ रोकना चाहते हैं।”
एनजीटी में फिर से अपील करने का निर्देश
सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर विचार करने से इनकार कर दिया। हालांकि, बेंच ने पर्यावरणविद को पुणे स्थित पश्चिमी क्षेत्र एनजीटी में फिर से अपील करने की अनुमति दी है। जिसमें परियोजना पर उनकी आपत्तियों पर विचार न किए जाने का मुद्दा उठाया जा सकता है।
वहीं ट्रिब्यूनल ने 26 नवंबर के अपने आदेश में परियोजना की ईआईए रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि, विस्तृत अध्ययनों से कोई महत्वपूर्ण प्रतिकूल प्रभाव नहीं दिखा है। इसकी जगह इस स्टडी में तो बंदरगाह वाले इलाके को पक्षियों की विविधता के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह बताया गया था।