सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की उस याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई है जिसमें बांबे हाई कोर्ट के एक दिसंबर, 2025 के फैसले को चुनौती दी गई है।
हाई कोर्ट ने ब्रह्मोस एयरोस्पेस के इंजीनियर निशांत अग्रवाल को जासूसी और सरकारी गोपनीयता अधिनियम के आरोपों से बरी कर दिया था।
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने उत्तर प्रदेश के आतंकरोधी दस्ते (यूपी एटीएस) की याचिका पर 13 जुलाई के अपने आदेश में कहा, “नोटिस जारी करें, जिसका जवाब 31 अगस्त, 2026 तक आना चाहिए।”
शुरुआत में यह मामला यूपी एटीएस ने दर्ज किया था और इसकी सुनवाई लखनऊ में हुई थी, लेकिन बाद में इसे नागपुर ट्रांसफर कर दिया गया क्योंकि कथित अपराध वहीं हुआ था। अग्रवाल को 2023 में जमानत मिल गई थी।
हालांकि, हाई कोर्ट ने पाया था कि अग्रवाल ने गैरकानूनी तरीके से संवेदनशील डाटा स्टोर किया था। हाई कोर्ट के आदेश से असंतुष्ट होकर उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
तीन जून, 2024 को नागपुर की जिला अदालत ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के लिए जासूसी करने के आरोप में अग्रवाल को सरकारी गोपनीयता अधिनियम के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई थी और 3000 रुपये का जुर्माना लगाया था।
नागपुर में कंपनी के मिसाइल सेंटर के तकनीकी शोध अनुभाग में काम करने वाले अग्रवाल को 2018 में सैन्य खुफिया इकाई और यूपी एवं महाराष्ट्र के एटीएस के संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया गया था।
उसके विरुद्ध आइपीसी और कड़े सरकारी गोपनीयता अधिनियम के विभिन्न प्रविधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। अग्रवाल ने ब्रह्मोस के उक्त सेंटर में चार वर्ष तक काम किया था।
महिला वकील पर लखनऊ कोर्ट में हमले का सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महिला अधिवक्ता द्वारा की गई एक तात्कालिक उल्लेख पर ध्यान दिया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उन पर और उनके मुवक्किल पर लखनऊ जिला अदालत परिसर में बार एसोसिएशन के एक पदाधिकारी ने हमला किया है।