देश के वयस्कों में मोटापा और हाई ब्लड शुगर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। खास बात यह है कि पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को मोटापा घेर रहा है। इससे जीवनशैली से संबंधित बीमारियों का बोझ बढ़ता जा रहा है।
भारत में 2019-21 के दौरान 15-49 वर्ष आयु वर्ग की 24 प्रतिशत महिलाएं मोटापे से ग्रस्त थीं, जो 2023-24 में 30.7 प्रतिशत हो गई।
इसी आयु वर्ग में मोटापे से ग्रस्त पुरुषों का अनुपात 22.9 प्रतिशत से बढ़कर 27.3 प्रतिशत हो गया। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 की रिपोर्ट में यह चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। देश के वयस्कों में हाई ब्लड शुगर में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं में हाई ब्लड शुगर या ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए दवा लेने का अनुपात 13.5 प्रतिशत से बढ़कर 17.8 प्रतिशत हो गया।
पुरुषों के मामले में यह आंकड़ा 15.6 प्रतिशत से बढ़कर 20.9 प्रतिशत हो गया। महिलाओं में मोटापे की सबसे अधिक दर पुडुचेरी में 46.3 प्रतिशत दर्ज की गई।
इसके बाद यह दर चंडीगढ़ में 44 प्रतिशत, दिल्ली में 41.4 प्रतिशत और पंजाब में 40.8 प्रतिशत रही। बिहार, छत्तीसगढ़ और असम जैसे राज्यों में महिलाओं में मोटापे की दर अपेक्षाकृत कम रही। पुरुषों में मोटापे की सबसे अधिक दर अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में लगभग 38 प्रतिशत दर्ज की गई।
इसके बाद पंजाब, केरल, तमिलनाडु, दिल्ली और गोवा का स्थान रहा।सर्वेक्षण के अनुसार, 15-24 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में मासिक धर्म सुरक्षा के स्वच्छ तरीकों का उपयोग 2019-21 में 77.6 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 79.2 प्रतिशत हो गया है।
राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत मासिक धर्म स्वच्छता योजना और प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के तहत किफायती स्वच्छता उत्पाद मुहैया कराया जा रहा है।
बच्चों में डायरिया के मामलों में गिरावट
भारत में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में डायरिया के मामलों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। टीकाकरण कवरेज में सुधार और सुरक्षित पेयजल की बेहतर उपलब्धता से बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में डायरिया का मामला 0.7 प्रतिशत से घटकर 0.5 प्रतिशत हो गया है।
पूर्ण टीकाकरण की दर 87.1 प्रतिशत हुई भारत ने टीकाकरण कवरेज और पोषण सहित बाल स्वास्थ्य मानकों पर महत्वपूर्ण सुधार दर्ज किया है। 12-23 महीने की आयु के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण कवरेज की दर 2019-21 के 83.8 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 87.1 प्रतिशत हो गई है। बच्चों में बौनापन और गंभीर कुपोषण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
आधुनिक गर्भनिरोधकों का घट रहा इस्तेमाल
विवाहित महिलाओं के बीच आधुनिक गर्भनिरोधक उपायों का इस्तेमाल घट रहा है, जबकि परिवार नियोजन की पारंपरिक विधियों पर निर्भरता बढ़ रही है। परिवार नियोजन की आधुनिक विधि का इस्तेमाल करने वाली विवाहित महिलाओं का अनुपात 2019-21 में 56.4 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 52.7 प्रतिशत हो गया। इसी दौरान पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल 10.3 प्रतिशत से बढ़कर 16.4 प्रतिशत हो गया।
जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान में वृद्धि तीन वर्ष से कम आयु के जिन बच्चों को जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराया गया, उनकी संख्या 2019-2021 में 41.8 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 50.1 प्रतिशत हो गई है। सर्वेक्षण अवधि के दौरान छह महीने से कम आयु के 95.6 प्रतिशत बच्चों को स्तनपान कराया गया। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि बच्चों के पोषण में उत्साहजनक प्रगति हुई है।