बदलती कृषि पद्धतियों और शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का सशक्त उदाहरण सक्ती जिले के डभरा तहसील अंतर्गत ग्राम जवाली के किसान श्री रामकुमार पटेल ने प्रस्तुत किया है। सीमित संसाधनों के बावजूद सूझबूझ, मेहनत और कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन के बल पर उन्होंने खेती को लाभकारी बनाते हुए समृद्धि की नई राह तैयार की है।
लगभग ढाई हेक्टेयर कृषि भूमि के स्वामी श्री पटेल वर्ष 2024-25 तक ग्रीष्मकालीन धान की खेती करते थे। हालांकि, बढ़ती लागत और अपेक्षाकृत कम लाभ के कारण उन्हें संतोषजनक आय प्राप्त नहीं हो पा रही थी। ऐसे में वर्ष 2025-26 में कृषि विभाग के अधिकारियों ने उन्हें फसल विविधीकरण अपनाने, विशेषकर सरसों की उन्नत खेती और कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली तकनीकों की जानकारी दी।
विभागीय मार्गदर्शन से प्रेरित होकर श्री पटेल ने धान की जगह सरसों की खेती अपनाने का निर्णय लिया। राष्ट्रीय मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयल सीड्स योजना के अंतर्गत उन्हें 1.00 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए सरसों की उन्नत किस्म पीएम-32 उपलब्ध कराई गई। इसके साथ ही आवश्यक कृषि आदान सामग्री और समय-समय पर तकनीकी परामर्श भी दिया गया। उन्नत बीज, वैज्ञानिक पद्धतियों और सतत मार्गदर्शन का परिणाम यह रहा कि उन्हें सरसों की पीएम-32 किस्म से लगभग 12.45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन प्राप्त हुआ। कुल 2.432 हेक्टेयर में उन्होंने 26.20 क्विंटल सरसों का उत्पादन किया।
श्री पटेल ने बीते दिनों प्राथमिक सेवा सहकारी समिति कोटमी में 23 क्विंटल सरसों बीज 6200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से विक्रय किया, जिससे उन्हें कुल 1,42,600 रुपये की आय प्राप्त हुई। कम लागत में बेहतर लाभ ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया, बल्कि खेती के प्रति उनका विश्वास भी और सुदृढ़ हुआ है।
श्री रामकुमार पटेल ने अपनी सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और कृषि विभाग को देते हुए आभार व्यक्त किया। उनकी इस उपलब्धि से प्रेरित होकर अब गांव के अन्य किसान भी फसल परिवर्तन, जल संरक्षण और सरसों जैसी लाभकारी फसलों की खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं। स्वयं श्री पटेल भी किसानों को शासकीय योजनाओं और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी देकर उन्हें आत्मनिर्भर और समृद्ध बनने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।