भारत में हवाई किराए के लिए नए नियम लागू होने जा रहे हैं। इन नियमों के तहत सरकार इस प्रक्रिया में तब तक दखल नहीं देगी, जब तक कि कोई असाधारण स्थिति न आ जाए या जहां सरकार को जनहित में ऐसा करना जरूरी लगे।
भारतीय वायुयान नियम, 2026 के तहत (जो 1 जनवरी, 2027 से लागू होंगे) सरकार ने अपनी उस नीति को जारी रखा है जिसके अनुसार हवाई किराए बाजार की ताकतों द्वारा तय किए जाते हैं और इसमें सरकार कोई दखल नहीं देती।
क्या कहता है नया नियम
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की नई एयरफेयर (हवाई किराया) नीति के तहत एयरलाइनों को एक फ्री मार्केट में काम करने की छूट होगी। इस नीति के तहत हवाई किराए को नियंत्रित करने या उस पर कोई ऊपरी सीमा लगाने की कोई योजना नहीं है।
हालांकि, इससे एयरलाइनों पर एक मजबूत नियंत्रण बना रहेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि असाधारण परिस्थितियों में, जब कुछ रूटों पर मांग अचानक बढ़ जाती है तो वे किराए में बहुत भारी बढ़ोतरी न कर दें।
नोटिफिकेशन में क्या कहा गया?
शनिवार (31 अक्टूबर) को जारी गजट नोटिफिकेशन में कहा गया है, “हर एयर ट्रांसपोर्ट कंपनी को परिचालन लागत जैसे कारकों के आधार पर अपना टैरिफ तय करना होगा। उन्हें महानिदेशक (DGCA) के पास एक तय प्रारूप, तरीके और समय-सीमा के अनुसार अपना टैरिफ जमा करना होगा। साथ ही आम जनता की जानकारी और पारदर्शिता के लिए उन्हें अपना टैरिफ अपनी वेबसाइट पर भी प्रकाशित करना होगा।”
एयरलाइंस से कहा गया है कि वे टैरिफ का पूरा विवरण दें, जिसमें यात्री द्वारा भुगतान की जाने वाली कुल राशि के साथ-साथ अलग-अलग घटकों जैसे बेस फेयर, टैक्स, फीस, कैंसिलेशन चार्ज, रिफंड की शर्तें और अन्य कोई भी शुल्क को अलग-अलग दिखाया जाए।
असाधारण परिस्थितियों में हस्तक्षेप के संबंध में इसमें कहा गया है, “यदि केंद्र सरकार की यह राय है कि कोई असाधारण स्थिति है तो वह जनहित में लिखित आदेश के माध्यम से निर्देश जारी कर सकती है। ये निर्देश परिस्थितियों के अनुरूप होने चाहिए और केवल तय की गई अवधि तक ही लागू रहेंगे।”