वुशू में दो बहनों का दुनिया में डंका, ईशा-अपराजिता ने अंतरराष्ट्रीय पदक जीत रचा इतिहास…

वुशू में महारत हासिल करने वालीं बहनें ईशा एवं अपराजिता मिश्रा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम ऊंचा कर रही हैं।

हरिसभा चौक निवासी गुरु दिनेश मिश्रा की पुत्री अपराजिता मिश्रा ने जार्जिया में आयोजित बाटुमी ओपन इंटरनेशनल वुशू प्रतियोगिता में एक स्वर्ण एवं एक कांस्य पदक जीत जिले की पहचान कायम की।

अपराजिता ने बीते वर्ष आयोजित नेशनल गेम में राज्य के लिए पदक का खाता खोला था। इससे पूर्व भी वह एक दर्जन राष्ट्रीय प्रतियोगिता में जिले के लिए पदक जीत चुकी हैं। बड़ी बहन ईशा मिश्रा भी राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी है और एक दर्जन से अधिक पदक जीत चुकी है।

तीन दशक पूर्व गुरु दिनेश मिश्रा ने जिस परंपरा की शुरुआत की थी, उनके निधन के बाद उनकी बेटियां उसे आगे बढ़ा रही हैं। दोनों बहनें बचपन से ही वुशू खेल को समर्पित रही है। पिता का अनुशासन और खेल के प्रति जुनून ही बेटियों के लिए प्रेरणा बना।

ईशा मिश्रा बताती हैं कि बचपन से ही वुशू खेल रही हैं। वर्ष 2007 में सब जूनियर नेशनल गोल्ड मेडल जीतकर यात्रा की शुरुआत की थी। पापा मेरे पहले कोच थे और सबसे बड़ी प्रेरणा भी। नेताजी सुभाष नेशनल इंस्टीट्यूट आफ स्पोर्ट्स पटियाला से कोचिंग डिप्लोमाधारी ईशा एनआइएस कोच भी हैं।

वह अब तक वह 20 से अधिक राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं और दो दर्जन से अधिक पदक जीत चुकी है। छोटी बहन अपराजिता मिश्रा भी पिता एवं बड़ी बहन के राह पर है।

वह दो अंतरराष्ट्रीय पदक समेत दो दर्जन से अधिक पदक जीत चुकी है। बिहार सरकार दोनों बहनों को सम्मानित कर चुकी है। दिनेश मिश्रा के निधन के बाद उनकी पत्नी सुमन मिश्रा दोनों बेटियों को आगे बढ़ा रही है।

बेटियां समाज के हर क्षेत्र में ऊंची उड़ान भर रही हैं। परिवार के लिए बेटियां अब अनमोल रत्न है। उनका पालन-पोषण, शिक्षा और आत्मनिर्भरता हर परिवार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
– डा. जयश्री, सहायक प्राध्यापक, एमएसकेबी कालेज

बेटियों का सम्मान और सशक्तीकरण ही देश की उन्नति का आधार है। बेटियां परिवार का गौरव और राष्ट्र का भविष्य हैं, इसलिए हम उनको जितना आगे बढ़ाएंगे परिवार एवं समाज की उन्नति होगी।
– डा. अनुराधा पाठक, एनएसएस समन्वयक, बीआरएबीयू

बेटियां शक्ति का प्रतीक है। वे परिवार की शान नहीं, बल्कि समाज, शहर और राष्ट्र की प्रगति की सशक्त आधारशिला हैं। आज बेटी के जन्म पर परिवार गर्व महसूस करता है।
– डा. मोनालिसा राय, समाज सेवी

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