बिहार की राजनीति में नया विवाद, कांग्रेस ने तेजस्वी यादव पर BJP से ‘डील’ का लगाया आरोप…

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का मतदान संपन्न होने के बाद सभी दलों की नजर 3 अगस्त को आने वाले नतीजों पर टिकी है।

इधर परिणाम से पहले ही महागठबंधन के भीतर सियासी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव पर तीखे राजनीतिक हमले क‍िए। 

उन्‍होंने बयान जारी कर गठबंधन की कार्यशैली और नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए हैं। असित नाथ तिवारी ने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव की अब महागठबंधन को मजबूत बनाए रखने में कोई रुचि नहीं रह गई है।

उनका कहना है कि गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में राजद नेतृत्व पूरी तरह विफल रहा, जिसका असर चुनावी रणनीति और प्रदर्शन पर भी पड़ा।

‘माई’ समीकरण भी नहीं बचा पाए तेजस्वी

कांग्रेस प्रवक्ता ने राजद के पारंपरिक ‘माई’ (मुस्लिम-यादव) वोट बैंक को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि बांकीपुर उपचुनाव में मुस्लिम और यादव मतदाताओं का समर्थन एकजुट नहीं रहा। 

यह वोट विभिन्न दलों में बंट गया। उनके अनुसार, राजद का परंपरागत सामाजिक आधार अब पहले जैसा मजबूत नहीं रहा और नेतृत्व इसे संभालने में सफल नहीं हो पा रहा है।

भाजपा से ‘अंदरूनी समझ’ के लगाए आरोप

असित नाथ तिवारी ने तेजस्वी यादव की राजनीतिक मंशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा है कि राजद नेतृत्व और भाजपा के बीच किसी प्रकार की अंदरूनी समझ बनी हुई है।

हालांकि उन्होंने इस आरोप के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया। उनका कहना था कि बांकीपुर चुनाव के दौरान गठबंधन के सहयोगी दलों को अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया, जिससे महागठबंधन की सामूहिक ताकत का पूरा उपयोग नहीं हो सका।

पिछली चुनावी रणनीति पर भी साधा निशाना

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब राजद की रणनीति पर सवाल उठे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले विधानसभा चुनाव में भी कई सीटों पर गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया गया।

‘फ्रेंडली फाइट’ जैसी स्थिति पैदा हुई। उनके मुताबिक, ऐसी रणनीतियों ने गठबंधन को नुकसान पहुंचाया और सहयोगी दलों में अविश्वास बढ़ाया।

नतीजों से पहले बढ़ी सियासी तल्खी

बांकीपुर उपचुनाव के परिणाम आने से पहले कांग्रेस की ओर से आए इन बयानों ने महागठबंधन के भीतर मतभेदों की चर्चा तेज कर दी है।

अब राजनीतिक नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राजद इन आरोपों का क्या जवाब देता है और चुनाव परिणाम के बाद महागठबंधन की आगे की रणनीति क्या होती है।

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