गाजियाबाद से फरार हत्यारोपित सोनू को ”सुरक्षित जेल पहुंचाने” वाले बिनावर थाने के दारोगा बलवीर सिंह को शुक्रवार रात निलंबित कर दिया गया। इंस्पेक्टर अरिहंत सिद्धार्थ ने पर्यवेक्षण में लापरवाही की, इसलिए उनकी कुर्सी छीनकर पुलिस लाइंस भेजा दिया गया। हत्यारोपित सोनू को मुठभेड़ जैसी सख्त कार्रवाई से बचाने के लिए 15 लाख रुपये का प्रस्ताव दिया गया था।
जिले के चार थानों के कुछ पुलिसकर्मियों तक यह प्रस्ताव पहुंचा मगर, बात नहीं बनी थी। बाद में बिनावर थाने के दारोगा बलवीर सिंह ने उसे बचाने का खेल किया। उसे तमंचा रखने के आरोप में गिरफ्तार दर्शाकर जेल जाने का रास्ता बनाया, ताकि वह गाजियाबाद पुलिस के हाथ न लग सके।
गाजियाबाद से फरार इनामी आरोपित की बदायूं के बिनावर थाने में हुई साठगांठ
12 जुलाई को गाजियाबाद में हार्न बजाने पर बाइक सवार विपिन कुमार की हत्या कर दी गई थी। हत्यारोपित सोनू वहां से भागकर बदायूं आया। बताया जाता है कि उसने बदायूं के एक थाने में तैनात दारोगा से मदद मांगी, जो उसका मामा है। उस दारोगा ने पहले अपने थाने, इसके बाद तीन थानों में बात की। बाद में बिनावर थाने में तैनात पूर्व परिचित दारोगा बलवीर से कहा तो उसने योजना बनाई।
मुठभेड़ जैसी सख्त कार्रवाई से बचाया, तमंचा रखने के आरोप में भेजा जेल
23 जुलाई को उसने सोनू को तमंचा रखने के आरोप में गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया। इस बीच गाजियाबाद पुलिस सोनू की लोकेशन मालूम करते हुए बिनावर आई तो पता चला कि उसे फर्जी नाम, पते से जेल भेजा जा चुका। इस प्रकरण की जानकारी एडीजी लॉ एंड ऑर्डर को दी गई, तब जांच बैठी। शुक्रवार को गाजियाबाद के कमिश्नर ने भी बदायूं की एसएसपी अंकिता शर्मा को पूरे प्रकरण की जानकारी दी।
एसएसपी ने कराई जांच
एसएसपी ने एसपी सिटी अभिषेक कुमार सिंह से जांच कराई। आंरभिक जांच में दारोगा बलवीर सिंह की मिलीभगत साबित हुई, इसी आधार पर निलंबित कर दिया गया। अब गाजियाबाद की पुलिस सोनू को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। उसे फर्जी नाम से जेल भेजने में कौन-कौन लोग शामिल थे, इसकी जांच के लिए एसएसपी ने एसपी देहात डा. हृदेश कठेरिया को जांच सौपी है।