उत्तर प्रदेश के मथुरा में संजय नगर कालोनी अतिक्रमण मामले में राज्य सरकार पुनर्वास योजना तैयार करने पर काम कर रही है और पुनर्वास योजना आने के बाद ही योजना के लाभ के पात्र अतिक्रमणकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ये भरोसा उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर दिलाया।
शीर्ष अदालत ने प्रदेश सरकार के हलफनामे को रिकार्ड पर लेते हुए राज्य सरकार के खिलाफ लंबित अवमानना याचिका निबटा दी है।
ये आदेश न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और एसवीएन भट्टी की पीठ ने गत 23 अप्रैल को प्रदेश सरकार का हलफनामा देखने के बाद जारी किये।
इस मामले में राज्य सरकार की कार्रवाई से प्रभावित होने वाले संजय नगर कालोनी के निवासियों ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की थी जिसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को पुनर्वास नीति बनाने को कहा था लेकिन राज्य सरकार ने पुनर्वास किए बगैर अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।
इस अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर मामले में हलफनामा मांगा था। गत 23 अप्रैल को प्रदेश सरकार के वकील तन्मय अग्रवाल कोर्ट में पेश हुए और उन्होंने प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल हलफनामा कोर्ट में दिया।
कोर्ट ने हलफनामे को रिकार्ड पर लिया जिसमें कहा गया था कि पहले पुनर्वास योजना तैयार की जाएगी और सिर्फ पात्र उम्मीदवारों का पुनर्वास किये जाने के बाद ही उनके अतिक्रमण हटाए जाएंगे।
संजय नगर कालोनी के अवमानना याचिका दाखिल करने वाले निवासियों की ओर से पेश वकील डाक्टर राजीव शर्मा ने कहा कि जब राज्य सरकार ने हलफनामा दाखिल कर भरोसा दिया है कि वो पुनर्वास करेगी और तबतक ध्वस्तीकरण नहीं किया जाएगा तो फिर अवमानना याचिका आगे जारी रखने की जरूरत नहीं है उसे निपटाया जा सकता है। जिसके बाद कोर्ट ने याचिका निबटा दी।
यह मामला सिंचाई विभाग की जमीन पर अवैध अतिक्रमण कर संजय नगर कालोनी में बने 700-800 अवैध मकानों का था जिसमें पहले चरण की मुकदमेबाजी में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को पुनर्वास नीति बनाने को कहा था और पुनर्वास नीति न बनने के बाद निवासियों ने अवमानना याचिका दाखिल की थी जिसमें कहा गया था कि उनका पुनर्वास किये बगैर उन्हें वहां से नहीं हटाया जाना चाहिए वे लोग पिछले 30-40 साल से वहां रह रहे हैं।
जिसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार से हलफनामा दाखिल कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट का आदेश निवासियों के लिए बड़ी राहत है।