‘अमेरिका के दबाव में नहीं आएंगे’, SCO मंच से ईरानी विदेश मंत्री अराघची का सख्त संदेश…

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यह स्पष्ट किया है कि तेहरान अमेरिकी दबाव या धमकियों के आगे बिल्कुल नहीं झुकेगा। उन्होंने कहा कि उनका देश किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या ताकत के इस्तेमाल के सामने घुटने नहीं टेकेगा।

प्रेस टीवी के अनुसार, किर्गिस्तान के चोलपोन-अता में शंघाई सहयोग संगठन के विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए, अराघची ने राजनयिक चैनलों पर चर्चा की।

जब उनसे साइडलाइन पर द्विपक्षीय बातचीत के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच मुख्य बाधा संचार मार्गों की कमी नहीं है, बल्कि अमेरिका की धमकाने और जबरदस्ती की लगातार नीति है।

अराघची ने कहा कि ईरान ने दिखा दिया है कि वह अमेरिकी धौंस के आगे नहीं झुकेगा और किसी भी परिस्थिति में ताकत, दबाव और धमकियों की भाषा का जवाब नहीं देगा।

ईरान के मूल सिद्धांत

उन्होंने यह भी बताया कि मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के साथ विभिन्न प्रस्तावों पर बातचीत करना एक स्वाभाविक कदम था। तेहरान के मुख्य रुख को स्पष्ट करते हुए, अराघची ने कहा कि ईरानी लोगों की रक्षा करना और होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के हितों की सुरक्षा करना हमारे सिद्धांतों में शामिल है।

उन्होंने आगे कहा, “जब तक ईरानी लोगों के वैध उद्देश्य और मांगें पूरी नहीं होतीं, हम स्वाभाविक रूप से अपना मार्ग जारी रखेंगे। हम धमकियों से डरते नहीं हैं, न ही हम दबाव के आगे झुकेंगे, और हम धमकियों की भाषा को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

SCO देशों से एकजुट होने की अपील

अराघची ने कहा कि मोर्चे पर तैनात ईरान के सशस्त्र बल और अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसके राजनयिक, राष्ट्र की सेवा में पूरक भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने SCO के सदस्य देशों जिसे उन्होंने एक प्रगतिशील संगठन बताया से वाशिंगटन और पश्चिमी निकायों के उस एकतरफा एजेंडे का विरोध करने का आग्रह किया, जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर हावी होना चाहते हैं।

शिखर सम्मेलन के दौरान अराघची ने किर्गिस्तान, रूस, पाकिस्तान, मिस्र, उज्बेकिस्तान और चीन के अपने समकक्षों से मुलाकात की। उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग यी और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ विस्तृत वार्ता का जिक्र करते हुए पुष्टि की कि तेहरान, बीजिंग और मॉस्को के साथ निरंतर समन्वय बनाए हुए है। अ

अपने संबोधन में अराघची ने SCO से एकतरफावाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने, अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन करने और राज्य की संप्रभुता की वकालत करने का आह्वान किया।

अमेरिका के लगातार हवाई हमले से तनाव

अराघची की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी सेना ने लगातार 13 रातों से ईरान में हवाई हमले किए हैं। फार्स समाचार एजेंसी द्वारा उद्धृत एक जानकार अधिकारी के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ओमान सागर की दिशा से प्रवेश कर रहे एक एलपीजी टैंकर को यह मानते हुए दो मिसाइलों से निशाना बनाया कि जहाज ईरानी गैस स्थानांतरित करने का प्रयास कर रहा था।

इस बीच, फ़ार्स ने बताया कि कुवैत में अमेरिकी अली अल-सलेम एयर बेस पर ड्रोन से हमला किया गया, और इराक के एरबिल में अलगाववादी समूहों के मुख्यालय को कई हवाई हमलों का निशाना बनाया गया। इसके अतिरिक्त, प्रेस टीवी ने बताया कि बहरीन में अमेरिका द्वारा संचालित अल-जुफेयर सैन्य अड्डे पर तीन विस्फोट हुए।

ईरान की चेतावनी

इस बीच, कड़ी चेतावनी देते हुए ईरान के खताम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के कमांडर मेजर जनरल अब्दुल्लाही ने कहा कि अब से हर एक शहीद ईरानी के बदले एक अमेरिकी सैनिक को निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि हमने आपके लिए नरक के सीधे और मुफ्त टिकट तैयार कर लिए हैं।

यह सब ऐसे समय हो रहा है जब क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां पूरी तरह सक्रिय हैं। गुरुवार को, CENTCOM ने कहा कि उसकी सेनाओं ने ईरान की सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाते हुए हमलों का एक और दौर “सफलतापूर्वक पूरा” कर लिया है। यह सैन्य अभियानों की 13वीं लगातार रात थी, जिसमें ईरान के बंदर अब्बास क्षेत्र में कम से कम दो लोगों के घायल होने की खबर है।

इसके जवाब में, ईरानी सेना ने शुक्रवार को अपने जारी ऑपरेशन लाइटनिंग के तहत कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए ड्रोन हमलों की एक नई लहर शुरू कर दी है।

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