भारत खरीद रहा अमेरिका के 31 MQ-9 रीपर ड्रोन, जानिए इसकी ताकत और खासियतें…

भारतीय सशस्त्र बल अपनी निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए अमेरिका से 31 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन खरीद रहे हैं। इस रणनीतिक रक्षा सौदे के तहत भारतीय नौसेना को 15 जबकि थल सेना और वायु सेना को 8-8 ड्रोन सौंपे जाएंगे।

लगभग 40 घंटे से अधिक की बेजोड़ उड़ान क्षमता और सैटेलाइट कनेक्टिविटी से लैस ये हाई-एल्टीट्यूड ड्रोन, मानवयुक्त विमानों की तुलना में अत्यधिक समय तक संवेदनशील सीमाओं और हिंद महासागर पर पैनी नजर रखने में सक्षम हैं।

एबीसी न्यूज के अनुसार, मिडिल ईस्ट संघर्ष की शुरुआत के बाद से ईरान ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा संचालित लगभग 30 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया है। अमेरिका ने इस सैन्य अभियान में अब तक लगभग 42 विमान खो दिए हैं। पश्चिम एशिया की जिम्मेदारी संभालने वाले अमेरिकी सेंट्रल कमांड के ऑपरेशन्स में रीपर ड्रोन की भूमिका बेहद अहम रही है।

क्या है ड्रोन की खासियत?

यह ड्रोन इराक, अफगानिस्तान, यमन और सीरिया में आईएसआईएस और समुद्री डकैती रोधी अभियानों में निगरानी और हमलों के लिए सालों से इस्तेमाल किया जा रहा है। रीपर मुख्य रूप से एक धीमा और ऊंचाई पर उड़ने वाला टोही ड्रोन है। यह उन अभियानों में काफी सफल रहा है जहां हवाई क्षेत्र में दुश्मन की ओर से कोई बड़ी चुनौती नहीं होती थी और दुश्मन के पास इसे निशाना बनाने की क्षमता नहीं थी।

हालांकि, ईरान के साथ संघर्ष में स्थिति अलग है। धीमी गति और अनुमानित उड़ान पथ के कारण यह ड्रोन एयर डिफेंस सिस्टम का आसान शिकार बन रहा है। इसके बावजूद, दुश्मन के इलाके में लंबी, धीमी और जोखिम भरी उड़ानें भरने की इसकी क्षमता इसे एक बहुमूल्य सैन्य संपत्ति बनाती है।

भारत भी खरीद रहा एमक्यू-9 रीपर

भारत भी अपनी तीनों सेनाओं के लिए इस घातक प्लेटफॉर्म की खरीद कर रहा है। इसके तहत भारतीय नौसेना को 15, जबकि थल सेना और वायु सेना को 8-8 रीपर ड्रोन मिलेंगे। इन ड्रोन्स की उड़ान क्षमता 40 घंटे है और ये मानवयुक्त विमानों की तुलना में बहुत लंबे समय तक अपने स्टेशन पर डटे रह सकते हैं, जिससे सटीक खुफिया जानकारी जुटाने में काफी मदद मिलती है।

भारत 3 बिलियन डॉलर से अधिक की लागत से इन ड्रोन्स की खरीद कर रहा है। इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से हिंद महासागर और भारत की लंबी जमीनी सीमाओं की निगरानी के लिए किया जाएगा। भारतीय नौसेना वर्तमान में लीज पर लिए गए दो रीपर ड्रोन का पहले से ही संचालन कर रही है।

DRDO को मिलेगा तकनीकी सहयोग

इस अहम रक्षा सौदे के तहत, कुल 31 में से 21 ड्रोन भारत में ही असेंबल किए जाएंगे, जबकि 10 ड्रोन फ्लाई-अवे स्थिति में खरीदे जाएंगे। इनमें लगभग 34 प्रतिशत उपकरण स्थानीय स्तर पर जुटाए जाएंगे। इसके अलावा, 4,000 करोड़ रुपये से अधिक का एक अलग अनुबंध भी साइन किया गया है।

यह अनुबंध 8 साल या 1,50,000 उड़ान घंटों के लिए परफॉर्मेंस बेस्ड लॉजिस्टिक्स प्रदान करने वाली एक मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल सुविधा स्थापित करने के लिए है। इस सौदे की एक अहम बात यह भी है कि अमेरिकी कंपनी जनरल एटॉमिक्स इसी तरह के मानवरहित हवाई वाहन विकसित करने में भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की सहायता करेगी। इन अत्याधुनिक ड्रोन्स की डिलीवरी साल 2029 से शुरू होने की उम्मीद है।

अमेरिका के पास 300 ड्रोन

अमेरिका वर्तमान में 300 से अधिक रीपर ड्रोन का संचालन करता है। इनमें से कई ड्रोन्स को सैटेलाइट लिंक के जरिए अमेरिका में बैठे पायलट रिमोट से उड़ाते हैं। इस ड्रोन की मारक क्षमता और खूबियों की बात करें तो यह एक एडवांस सेंसर सूट से लैस है। इसमें दिन, रात और थर्मल इमेजिंग के लिए इलेक्ट्रो-ऑप्ट्रॉनिक पॉड और विभिन्न कार्यों के लिए ट्यून किए गए रडार लगे हैं।

यह ड्रोन हथियारों के मामले में भी बेहद घातक है, जो अपने साथ आठ एजीएम-114 हेलफायर एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें ले जा सकता है। इसके अलावा इसे GBU-12 पेववे II लेजर-गाइडेड बम, जॉइंट डायरेक्ट अटैक म्यूनिशन और एयर-टू-एयर स्टिंगर्स से भी लैस किया जा सकता है।

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