पीएम नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलिड्स के साथ विस्तृत द्विपक्षीय बैठक की।
इस बैठक में दोनों देशों ने भारत-साइप्रस संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का औपचारिक दर्जा देने का महत्वपूर्ण ऐलान किया।
यूरोपीय संघ (ईय़ू) का समुद्री द्वार समझे जाने वाले साइप्रस ईयू का छठा देश है जिसके साथ भारत ने अपने संबंधों को यह दर्जा दिया है।
आज की बैठक में इंफ्रास्ट्रक्चर, शिपिंग, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोध और व्यापार सहयोग को नई गति देने के लिए संयुक्त टास्क फोर्स गठित करने का फैसला लिया गया।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
बैठक के बाद संयुक्त प्रेस संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा “पिछले दशक में साइप्रस से भारत में निवेश लगभग दोगुना हो चुका है। हमारा लक्ष्य अगले पांच वर्षों में इसे फिर से दोगुना करना है। इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए आज हम अपने विश्वसनीय संबंध को रणनीतिक साझेदारी में ऊंचा उठा रहे हैं।”
मोदी ने दोनों देशों के बीच दोस्ती को “मजबूत और भविष्योन्मुखी” बताया। उन्होंने कहा कि भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के बाद साइप्रस के माध्यम से व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग के नए द्वार खुलेंगे। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के संकट और यूक्रेन युद्ध पर भी गहन चर्चा की।
पीएम मोदी ने भारत के इस मत को फिर दोहराया कि उक्त दोनों क्षेत्रों में शांति स्थापना और संघर्ष के शीघ्र समाप्ति के सभी प्रयासों का समर्थन करता रहेगा। दोनों पक्षों ने वैश्विक संस्थाओं (यूएन, यूएनएससी आदि) के सुधार पर भी एकमत जताया और कहा कि बढ़ती वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए यह सुधार अत्यंत आवश्यक है।
यह रणनीतिक साझेदारी ऐसे समय में हुई है जब तुर्की पाकिस्तान के साथ अपने रक्षा और सैन्य संबंधों को लगातार मजबूत कर रहा है। पिछले वर्ष आपरेशन सिंदूर में यह बात सामने आई कि तुर्की ने पाकिस्तान को पूरा समर्थन दिया है। दूसरी तरफ साइप्रस लंबे समय से तुर्की के साथ क्षेत्रीय विवाद और तनाव में फंसा हुआ है।
हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को साफ-साफ कहा कि भारत और साइप्रस के बीच बढ़ते संबंध किसी तीसरे देश के विरुद्ध नहीं हैं। वैसे दोनों देश सुरक्षा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं, जिसमें समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी कार्रवाई शामिल हैं। शुक्रवार को उच्चस्तरीय बैठक में भी रक्षा सहयोग एक अहम मुद्दा रहा है।
दोनों देश रक्षा क्षेत्र में सहयोग का एक रोडमैप बना रहे हैं।साइप्रस का भारत के लिए खास सामरिक महत्व है क्योंकि यह यूरोप का महत्वपूर्ण समुद्री द्वार माना जाता है। बदलते वैश्विक माहौल में भारत और ईयू के बीच संबंध तेजी से मजबूत हो रहे हैं। पीएम मोदी हाल ही में चार यूरोपीय देशों की यात्रा के बाद भारत लौटे हैं।
तीन दिवसीय भारत के दौरे पर साइप्रस के राष्ट्रपति
साइप्रस राष्ट्रपति का तीन दिवसीय भारत दौरा दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक संतुलन और बहुआयामी साझेदारी को नई दिशा दे सकता है। पीएम मोदी ने वर्ष 2025 में साइप्रस की आधिकारिक यात्रा की थी, जिसने दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास को और मजबूत किया था। तब से लेकर अब तक आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंधों में निरंतर प्रगति हुई है।