पाकिस्तान-बांग्लादेश सीमा को अभेद्य बनाने की तैयारी, अमित शाह ने ‘स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट’ का किया एलान…

घुसपैठ और तस्करी जैसी दशकों पुरानी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए मोदी सरकार ने पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा को ड्रोन, रडार, आधुनिक कैमरों और तकनीक के सहारे पूरी तरह से अभेद्य बनाने जा रही है।

गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने एक साल में “नई बार्डर स्ट्रेटेजी” के तहत “स्मार्ट बोर्डर प्रोजेक्ट” शुरू करने का ऐलान किया है।

पाकिस्तान और बांग्लादेश की सीमा पर तैनात बीएसएफ के संस्थापक रूस्तमजी की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में जनसांख्यिकी परिवर्तन से निपटने के लिए प्रस्तावित उच्चाधिकार प्राप्त जनसांख्यिकी मिशन का जल्द ही गठन किया जाएगा।

पीएम मोदी ने किया था एलान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पिछले साल लालकिले से इस मिशन के गठन का ऐलान किया था। अमित शाह के अनुसार”स्मार्ट बोर्डर प्रोजेक्ट” के तहत सीमा पर ” तकनीक आधारित स्मार्ट सिक्योरिटी ग्रिड” खड़ी करने का रोडमैप तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने साफ किया कि सीमावर्ती इलाकों में असामान्य तरीके जनसांख्यिकी परिवर्तन नहीं होने देंगे और एक-एक घुसपैठियों को बाहर निकालेंगे। शाह ने कहा कि त्रिपुरा और असम के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी ऐसी सरकार आ गई है, जो घुसपैठ को रोकने के लिए कृतसंकल्प है।

उन्होंने बीएसएफ को इनके साथ मिलकर काम करने की सलाह दी। उनके अनुसार बीएसएफ को सीमा की सुरक्षा को अलग-थलग देखने के बजाय समेकित तरीके से देखने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि बीएसएफ को जिला प्रशासन, पुलिस थाना, पंचायत औप पटवारियों के साथ मिलकर घुसपैठ को बंद करने को कहा।

ड्रोन ने बढ़ाया खतरा

अमित शाह के अनुसार सीमा की सुरक्षा सिर्फ ड्यूटी मानने के बजाय उस पूरे क्षेत्र की जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीमा से अवैध घुसपैठ के साथ ही ड्रग्स की तस्करी, गौ-तस्करी, नकली करेंसी की तस्करी के साथ ही संगठित अपराध की चुनौतियां हैं।

ड्रोन ने इन खतरों को और बढ़ा दिया है। इन सभी समस्याओं से बीएसएफ अकेले नहीं निपट सकती है। इसके लिए बीएसएफ को एनसीबी, राज्य पुलिस, अन्य अर्द्धसैनिक बलों और खुफिया ब्यूरो के साथ मिलकर काम करना होगा।

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