राज्य स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पश्चिमी सिंहभूम जिला मलेरिया से प्रभावित रहा है। खास कर सारंडा क्षेत्र मलेरिया जोन के रूप में चिन्हित है।
वर्ष 2025-26 में 17 हजार 77 मरीज मलेरिया के जिले में मिले हैं। इसमें से पीएफ 14 हजार 300 और पीवी दो हजार 777 मरीज मिले।
हालांकि इन सभी मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज किया गया, लेकिन इतने बड़े संख्या में मलेरिया के मरीज मिलना चिंता का विषय है।
जिले के लिए राहत की बात है कि इसमें से किसी भी मौत मलेरिया से नहीं हुई है। वहीं जिला मलेरिया विभाग ने जांच का दायरा भी बढ़ाया है।
पिछले एक साल में 3 लाख 70 हजार 766 लोगों का मलेरिया जांच किया गया है।
जिले में सबसे अधिक मलेरिया के मरीज गोइलकेरा 3721, बड़ाजामदा में 2594, मनोहरपुर में 2573 और टोंटो में 1723 मरीज मिले हैं। इस प्रकार से देखा जाए तो यह सभी प्रखंड सारंडा क्षेत्र में आते हैं, जो पहले से ही मलेरिया जोन के रूप में चिन्हित है।
मलेरिया बीमारी ने बदल लिया है अपना रूप : डॉ. मीना कालुंडिया
जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. मीना कालुंडिया ने कहा कि 2025-26 में की आंकड़ों पर नजर डालें तो 3 लाख 70 हजार से अधिक मरीजों का मलेरिया जांच किया गया, जिसमें 17 हजार के करीब मलेरिया पॉजिटिव मिले हैं। इन सभी मरीजों को बेहतर दवा देकर पूरी तरह मलेरिया से मुक्त किया गया है।
वहीं 2024-25 में 2 लाख 80 हजार के करीब मरीजों का जांच किया गया, जिसमें 21 हजार से अधिक मरीज मिले थे। इस प्रकार जिला मलेरिया विभाग कुछ बेहतर स्थिति में काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि तेज बुखार, ठंड या कंपकंपी होने पर मलेरिया के लक्षण पाये जाते हैं। लेकिन वर्तमान समय एक नया सिमटम मरीजों में देखने को मिल रहा है।
अगर किसी मरीज को दस्त, उल्टी भी हो रही है, उनका जांच करने पर भी मलेरिया के लक्षण मिल रहे हैं। एक प्रकार से कहा जाये तो मलेरिया की बीमारी अपना रूप बदल रही है। इसको लेकर सही जांच और शोध की जरूरत है।
मलेरिया के मच्छरों बचाव के लिए क्या करें
डॉ. मीना कालुंडिया ने कहा कि घर के आसपास पानी जमा न होने दें। मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए रुके हुए पानी को हटा दें। कूलर, पुराने टायरों, नारियल के खोल और गमलों में जमा पानी को हर हफ्ते साफ करें। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग जरुर करें।
शाम और रात के समय बाहर निकलते समय पूरी बाजू की कमीज और लंबी पैंट पहनें। शाम के समय घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें या उन पर जाली लगवाएं। घर के आस-पास घास न उगने दें और सफाई रखें।
पश्चिमी सिंहभूम जिला में 2025-26 में केंद्रों में मिले मलेरिया के मरीज
| केंद्र का नाम | मलेरिया के मरीज |
|---|---|
| बंदगांव | 594 |
| बड़ाजामदा | 2594 |
| चक्रधरपुर | 488 |
| गोइलकेरा | 3721 |
| जगन्नाथपुर | 674 |
| झींकपानी | 872 |
| खूंटपानी | 305 |
| कुमारडुंगी | 440 |
| मझगांव | 95 |
| मंझारी | 370 |
| मनोहरपुर | 2573 |
| सदर चाईबासा | 475 |
| सोनुवा | 1701 |
| तांतनगर | 96 |
| टोंटो | 1723 |
| कुल मरीज | 16321 |