लखनऊ का ‘खौफनाक’ गुरुकुल: 11 साल के मासूम को सिगरेट से दागने, भूखा रखने और मारपीट के बाद हत्या का आरोप, संचालक का कबूलनामा सामने आया…

लखनऊ के आलमनगर स्थित गुरुकुल में महाराजपुर के गौरिया गांव निवासी 11 साल के छात्र दिव्यांश द्विवेदी की बर्बर हत्या में आरोपित संचालक कन्हैया उर्फ सौरभ ने पुलिस के सामने अपना गुनाह कबूल लिया है।

उसने बताया कि दिव्यांश गुरुकुल में आने के बाद बहुत ज्यादा शैतानी करता था। वह कहना नहीं मानता था और गुरुकुल में रुकने को भी तैयार नहीं था।

आरोपित ने बताया कि इससे गुरुकुल का माहौल बिगड़ रहा था। इसके चलते गुस्से में उसे पहले बुरी तरह पीटा फिर जोर से लात मारी। इससे वह दीवार में जाकर भिड़ गया और सिर व नाक फट गई।

कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। अगले दिन छात्र का शव महाराजपुर में उसके घर छोड़कर वह भाग निकला। फिलहाल, पुलिस ने आरोपित कन्हैया के साथ ही उसकी महिला मित्र हर्षिता सोनी को गिरफ्तार कर शुक्रवार को जेल भेज दिया।

हर्षिता पर साक्ष्य मिटाने का आरोप है। वहीं, जेल जाने से पहले कन्हैया को अपने किए पर पछतावा तो था लेकिन उसके चेहरे पर क्रूरता साफ झलक रही थी।

शव ठिकाने लगाने की थी तैयारी

हत्यारोपित 27 वर्षीय गुरुकुल संचालक कन्हैया मूल से रूप से बांदा के पैलानी थाने के चंदवारा का रहने वाला है। वह वर्तमान में लखनऊ के पारा थाना के जेबी गार्डन कालोनी पूर्वीदीन खेड़ा राजाजीपुरम में रह रहा था।

पुलिस पूछताछ में उसने बताया कि दिव्यांश की मौत के बाद वह घबरा गया था। पहले तो उसने शव को भी ठिकाने लगाने की योजना बनाई लेकिन गुरुकुल में अन्य छात्रों की मौजूदगी के चलते ऐसा नहीं कर सका।

महिला मित्र को बुलाया

घटना की जानकारी गुरुकुल के बगल में रहने वाली महिला मित्र 23 वर्षीय हर्षिता सोनी को दी तो उसने मौके पर पहुंचकर हत्या से जुड़े साक्ष्यों को मिटाने का प्रयास किया। वह मूल रूप से मध्यप्रदेश के छतरपुर के रामकली बजरिया मोती चंद्र बाजार की रहने वाली है। हत्या के बाद उसने गुरुकुल के कैमरे तोड़ दिए थे। हालांकि, पुलिस को जांच के दौरान फुटेज में जघन्यता के सभी सुबूत मिल गए, जिसने दोनों आरोपितों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।

लखनऊ स्थानांतरित होगी जांच

महाराजपुर थाना प्रभारी राजेश कुमार ने बताया कि आरोपितों को जेल भेज दिया गया है। छात्र की मौत लखनऊ के पारा थाने के अंतर्गत गुरुकुल में ही हुई थी। घटनास्थल वहीं पर होने के चलते मुकदमा पारा थाने में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। आगे की विवेचना वहीं की पुलिस करेगी। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

यह है मामला

महाराजपुर के गौरिया निवासी नरेन्द्र द्विवेदी रूमा में एक फैक्ट्री में काम करते हैं। घर की माली हालत ठीक न होने के चलते 11 वर्षीय बेटे दिव्यांशु उर्फ दीपू को एक सप्ताह पहले लखनऊ के गुरुकुल में पढ़ने भेजा था। बुधवार सुबह गुरुकुल से फोन कर सूचना दी गई कि बेटा सीढ़ियों से गिरकर घायल हो गया है। स्वजन लखनऊ जाने की तैयारी कर ही रहे थे कि दोपहर लगभग 11 बजे गुरुकुल संचालक कन्हैया मिश्रा उर्फ सौरभ कार से आया और शव घर के बाहर छोड़कर फरार हो गया। दिव्यांश के शरीर में गहरी व गंभीर चोटों के निशान देख स्वजन ने पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस जांच में सामने आया कि गुरुकुल संचालक दिव्यांश को चार दिनों से यातनाएं दे रहा था। हाथ-पैर बांध कमरे में बंद कर उसे भूखा-प्यासा रखा था। छात्र को डंडे से बर्बरता से पीटने के बाद उसे लात मारी थी। इससे छात्र की दीवार से टकराकर मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दिवंगत छात्र के शरीर पर चोटों और सिगरेट से जलाने के 42 निशान मिले थे।

कहता था- गुरुकुल की बात घर में बताई तो मिलेगी दोगुणा सजा

गुरुकुल में पढ़ने वाले एक छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कन्हैया मिश्रा अनुशासन के नाम पर छात्रों के साथ बात-बात पर डांट, डपट व मारपीट करता रहता है। छोटी सी भी गलती पर कठोर सजा देता था। उसने एक बार जो कह दिया तो उसको मानना ही छात्रों की मजबूरी थी। सख्त निर्देश थे कि यदि गुरुकुल की बात घर में बताई तो सजा दोगुणा मिलेगी। इससे बच्चे चुपचाप सहते रहते थे।

दूर के रिश्ते में दिव्यांशु का मामा है हत्यारोपित कन्हैया

गुरुकुल संचालक कन्हैया ने न सिर्फ एक मासूम की जान ले ली, बल्कि उसने रिश्तों का भी खून कर दिया। दरअसल, वह दिव्यांशु का रिश्ते में मामा लगता है। भांजा होने के बावजूद आरोपित मामा कन्हैया ने अपनी ही बहन नीरज के इकलौते बेटे की पीट-पीटकर हत्या कर दी। उसने उसे भूखा-प्यासा रखकर और धूप में खड़ा करके मारापीटा। इतने पर भी उसका मन नहीं भरा तो उसे लात मारकर जान ले ली।

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