HRTC फिर शुरू करेगा वेट लीज मॉडल पर बस संचालन, पहले चरण में अंतरराज्यीय रूटों पर उतारने की तैयारी…

हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) 2200 करोड़ के घाटे के बावजूद वैट लीज आधार पर बसें चलाने की तैयारी कर रहा है। निगम प्रबंधन पहले अंतरराज्यीय रूट पर वैट लीज आधार बसें चलाएगा। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में गति दिनों हुई निदेशक मंडल (बीओडी) की बैठक में इस पर विस्तृत चर्चा हुई है।

हालांकि यह प्रस्ताव बीओडी के एजेंडे में नहीं था। बैठक के दौरान ही एजेंडे के तौर पर इसे लाया गया था। निदेशक मंडल ने एचआरटीसी के प्रबंध निदेशक को इसका विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

इस योजना को दोबारा शुरू करने से पहले निगम कैबिनेट में भी इस प्रस्ताव को रखेगा। एचआरटीसी का तर्क है कि दिल्ली, चंडीगढ़, अंबाला, पंजाब सहित अन्य राज्यों के लिए जितनी भी बसें चल रही हैं सभी घाटे में हैं।

वैट लीजिंग रखा था योजना का नाम

एचआरटीसी ने वैट लीजिंग नाम से योजना शुरू की थी। इसकी शुरुआत लग्जरी बसों से की गई थी। 63 रूट लग्जरी बसों के वैट लीज आधार पर चलाए गए थे। कुछ रूट पर साधारण बसें भी इसी आधार पर चलाई गई थी। 120 बसें वैट लीज आधार पर चली थी। इसका किराया 40 से 60 रुपये प्रति किलोमीटर तय किया था। कुछ बसों का डीजल एचआरटीसी ही डालता था उसके पैसे काटे जाते थे। एचआरटीसी को डीजल रियायती दर पर मिलता है। कुछ रूट पर आपरेटर खुद डीजल डालते थे। लग्जरी व डीलक्स बसें शिमला, चंबा, धर्मशाला व कुल्लू मनाली के लिए चली थी।   

वैट लीज दोबारा शुरू करने का निर्णय क्यों

वैट लीज आधार पर बस सेवा दोबारा शुरू करने के पीछे दो तर्क दिए जा रहे हैं। पहला घाटे के रूट हैं। दूसरा निजी आपरेटर रूट लेने के बावजूद बसें चलाने में रुचि नहीं ले रहे हैं। तीन वर्ष में परिवहन विभाग 250 से ज्यादा रूट निजी आपरेटरों को देने के लिए आवेदन मांग चुका है। 52 रूट पर ही बसें चल पाई हैं। आपरेटर इन रूट को लेने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं इसलिए निगम इस विकल्प पर काम कर रहा है।

विरोध के बाद बंद की थी योजना

पहले जब जीएस बाली परिवहन मंत्री बने थे तो उन्होंने इस योजना की शुरुआत की थी। निगम के ही कर्मचारियों ने इसका सबसे ज्यादा विरोध किया था। आरोप लगाया था कि निजी आपरेटरों को ज्यादा पैसा दिया जा रहा है। आपरेटरों की मनमर्जी व अन्य राज्यों से अवैध तरीके से सामान लाने के आरोप लगे थे। सत्ता परिवर्तन के बाद इस योजना को बंद कर दिया गया था।

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