नेशनल प्रेस फाउंडेशन की ‘इंटरनेशनल रिपोर्टिंग फेलोशिप’ के तहत पत्रकारों के साथ हुई एक विस्तृत चर्चा में पाकिस्तान के बारे में कड़ी टिप्पणी की गई। इसमें देश को एक ऐसे राज्य के तौर पर बताया गया जो विफलता की कगार पर खड़ा है।
यह आलोचना बिलहारी कौसिकन ने की। वे नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के एक स्वायत्त संस्थान मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के चेयरमैन हैं। कौसिकन ने 2010 से 2013 तक सिंगापुर के विदेश मंत्रालय में स्थायी सचिव के तौर पर काम किया था।
पाकिस्तान की खामियों को किया उजागर
उथल-पुथल भरे भू-राजनीतिक दौर में सही नजरिया बनाए रखने के विषय पर बोलते हुए लंबे समय से राजनयिक रहे कौसिकन ने एक स्थिर अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के तौर पर पाकिस्तान की छवि को गलत साबित कर दिया। इसके अलावा, उन्होंने देश में फैली गहरी अंदरूनी अस्थिरता और कट्टरपंथ को भी उजागर किया। उन्होंने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की गंभीर और बुनियादी कमजोरियों का भी खुलासा किया।
पाकिस्तानी पत्रकार ने खुद खोली अपने देश की पोल
दक्षिण एशियाई देश में अंदरूनी हालात बिगड़ने की गंभीर सच्चाई तब सामने आई, जब एक पाकिस्तानी पत्रकार ने राजनयिक से पाकिस्तान पर अमेरिका-ईरान टकराव के असर के बारे में सवाल किया। पत्रकार ने यह भी पूछा कि अगले पांच सालों में देश की स्थिति क्या होगी।
पत्रकार ने अंदरूनी उथल-पुथल का गंभीर ब्योरा दिया। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे घरेलू हालात बिगड़ने से भारी महंगाई बढ़ी है और ईंधन की कीमतें दोगुनी हो गई हैं। इसके अलावा, इसी वजह से कतर ने पाकिस्तानी पासपोर्ट धारकों के लिए ‘वीजा-ऑन-अराइवल’ की सुविधा रोक दी है।
आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के बिगड़ने का जिक्र करते हुए पत्रकार ने कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर जनता के हिंसक हमलों की ओर भी इशारा किया। इन हमलों के कारण इस केंद्र को बंद करना पड़ा। इसके अलावा, आंशिक लॉकडाउन भी लगाए गए। इन लॉकडाउन ने जनता को एक बड़े संकट में डाल दिया है।
कौसिकन ने क्या जवाब दिया?
कौसिकन ने साफ तौर पर इस बात को खारिज कर दिया कि इस्लामाबाद की कूटनीतिक चालें उसकी बुनियादी कमजोरियों की भरपाई कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि बाहरी दिखावे से वहां की जनता की मुख्य समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता।
कौसिकन ने कहा, “मैं बिल्कुल साफ-साफ कहूंगा। पाकिस्तान ने एक कूटनीतिक मौके का फायदा उठाने में बहुत तेजी और कामयाबी दिखाई और इससे कम से कम अमेरिका की नजर में पाकिस्तान की कूटनीतिक छवि को सुधारने में कुछ मदद जरूर मिली है लेकिन, आप जानते हैं इससे पाकिस्तान के लोगों का पेट नहीं भरता।”
‘अजीबोगरीब गुटों का गढ़ है पाकिस्तान’
कौसिकन ने आगे कहा, “पाकिस्तान एक ऐसा देश है जो नाकाम होने की कगार पर खड़ा है और काफी समय से ऐसी ही हालत में है। अच्छी बात यह है कि यह पूरी तरह से नाकाम नहीं हुआ है, लेकिन इस कूटनीतिक कामयाबी से असलियत नहीं बदल जाती और मुझे नहीं लगता कि अमेरिका पाकिस्तान पर लगी सभी पाबंदियां पूरी तरह हटाएगा, क्योंकि असलियत यह है कि पाकिस्तान कई तरह के अजीबोगरीब गुटों का गढ़ है जो जरूरी नहीं कि अमेरिका के हितों के लिए काम कर रहे हों।”
उन्होंने कहा, “पाकिस्तानी सेना बहुत फुर्तीली और सफल रही, इसके लिए उन्हें श्रेय देना ही होगा लेकिन कूटनीतिक सफलता से लोगों का पेट नहीं भरता। यही कड़वी सच्चाई है। पाकिस्तान की समस्याएं कूटनीतिक नहीं हैं। पाकिस्तान की समस्याएं उसके भीतर ही कहीं ज्यादा बुनियादी हैं।”
कौसिकन ने कहा, “और हर कोई इसे लेकर चिंतित है क्योंकि आपके पास परमाणु हथियार हैं। अगर आपके पास परमाणु हथियार न होते तो किसी को कोई परवाह नहीं होती।”