केरल में नई UDF सरकार का गठन, CM सतीशन के साथ शपथ लेने वाले सभी मंत्रियों की पूरी लिस्ट सामने आई…

 केरलम में कांग्रेस के नेतृत्व में यूडीएफ सरकार बन गई है। तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में वीडी सतीशन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ 20 विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली।

इन मंत्रियों में कांग्रेस के 11, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के पांच और यूडीएफ के अन्य गठबंधन सहयोगियों के चार नेताओ को मंत्री बनाया गया है। तो आइए मिलते हैं सीएम सतीशन की कैबिनेट से…

वीडी सतीशन

पार्टी: कांग्रेस, विभाग: मुख्यमंत्री (वित्त, विधि और बंदरगाह), निर्वाचन क्षेत्र: परावुर, आयु: 61 शिक्षा: बीए, एलएलएम

विपक्ष के नेता के तौर पर सतीशन ने लगातार मुद्दों पर आधारित बात की और सत्ता-विरोधी माहौल बनाया। सत्ताधारी एलडीएफ के खिलाफ यूडीएफ के अभियान को आकार देने में अहम भूमिका निभाई। सबसे अहम पल तब आया, जब उन्होंने ऐलान किया कि अगर यूडीएफ सत्ता में वापस नहीं आ पाई तो वे ‘वनवास’ (राजनीतिक निर्वासन) पर चले जाएंगे।

इस बयान को एक बड़ा राजनीतिक दांव माना गया, जिससे उनके करियर को नुकसान पहुंच सकता था लेकिन इसने मतदाताओं पर गहरा असर डाला और यूडीएफ की जोरदार वापसी की। जिसका नतीजा ये निकला कि उसने शानदार जीत हासिल की।

के. मुरलीधरन

पार्टी: कांग्रेस, पोर्टफोलियो: बिजली और देवस्वोम, निर्वाचन क्षेत्र: वट्टियूरकावु, आयु: 69, शिक्षा: बीए

वह सतीशन का समर्थन करने वाले वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं और कैबिनेट में उनका शामिल होना लगभग तय था। हालांकि, खबरों के मुताबिक उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय मांगा था, लेकिन संभावना है कि उन्हें बिजली विभाग की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। उन्होंने 2004 में ए.के. एंटनी के मंत्रिमंडल में कुछ समय के लिए संभाला था।

वट्टियूरकावु से तीन बार विधायक रह चुके वह फिलहाल किसी भी बड़े गुट से बाहर हैं। कैबिनेट में वह एक अपेक्षाकृत स्वतंत्र और अनुभवी वरिष्ठ सदस्य साबित होंगे।

रमेश चेन्निथला

पार्टी: कांग्रेस, विभाग: गृह और सतर्कता, निर्वाचन क्षेत्र: हरिपाद, आयु: 69, शिक्षा: बीए

मुख्यमंत्री का पद न मिलने के कारण वे सतीशन कैबिनेट में शामिल होने से हिचकिचा रहे थे लेकिन उनकी गैर-मौजूदगी से पड़ने वाले राजनीतिक प्रभाव को लेकर जताई गई चिंताओं के बीच कांग्रेस आलाकमान के हस्तक्षेप पर उन्होंने अपना रुख बदल लिया।

उन्हें गृह और सतर्कता विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई। एक अनुभवी नेता के तौर पर चेन्निथला 28 वर्ष की आयु में के. करुणाकरण कैबिनेट (1986-87) में केरल के सबसे कम उम्र के मंत्री बने थे और बाद में उन्होंने गृह मंत्री और विपक्ष के नेता के रूप में भी कार्य किया।

मंत्रिमंडल के भीतर अनुभव, गुटीय समीकरणों और प्रशासनिक प्रभाव के बीच संतुलन बनाने के एक प्रयास के तौर पर उनके शामिल होने को देखा जा रहा है।

तिरुवनचूर राधाकृष्णन

पार्टी: कांग्रेस, पद: विधानसभा अध्यक्ष, निर्वाचन क्षेत्र: कोट्टायम, आयु: 80, शिक्षा: एलएलबी

यूडीएफ के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले नेता के तौर पर उन्होंने अपनी एक ऐसी साख बनाई, जिस पर उनके वोटर लगातार भरोसा करते रहे। यही वजह है कि वे 1991 से लगातार विधानसभा चुनाव जीतते आ रहे हैं।

हालांकि उन्हें मंत्री पद के लिए नजरअंदाज कर दिया गया था, लेकिन के.सी. वेणुगोपाल खेमे से उनकी नजदीकी ने यह सुनिश्चित किया कि उन्हें स्पीकर के पद पर बिठाया जाए। इस नियुक्ति को उनके लंबे विधायी अनुभव की पहचान और यूडीएफ के भीतर राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की एक कोशिश, दोनों ही नजरिए से देखा जा रहा है।

टी. सिद्दीकी

पार्टी: कांग्रेस, विभाग: वन, निर्वाचन क्षेत्र: कल्पेटा, आयु: 51, शिक्षा: एलएलबी

कांग्रेस में मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर किए गए विचार-विमर्श ने सिद्दीकी को शामिल करने में अहम भूमिका निभाई। जहां यह माना जा रहा था कि सतीशन, शनीमोल उस्मान के पक्ष में थे और वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला ने अनवर सादात का समर्थन किया था, वहीं सिद्दीकी के लिए के.सी. वेणुगोपाल का दबाव इतना जबरदस्त था कि उसे टाला नहीं जा सका।

सिद्दीकी का कलपेट्टा का प्रतिनिधित्व करना भी उनके पक्ष में रहा। यह क्षेत्र वायनाड लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और जिसका प्रतिनिधित्व प्रियंका गांधी करती हैं। उनका शामिल होना कांग्रेस के उन प्रयासों को दर्शाता है जिनके तहत वह मालाबार क्षेत्र में आईयूएमएल से परे अपने मुस्लिम प्रतिनिधित्व को मजबूत करना चाहती है।

शानीमोल उस्मान

पार्टी: कांग्रेस, पद: उपाध्यक्ष, निर्वाचन क्षेत्र: अरूर, आयु: 59, शिक्षा: एमए और एलएलबी

अरूर से विधानसभा में शनीमोल उस्मान की वापसी एक राजनीतिक वापसी होने के साथ-साथ पार्टी के भीतर सतीशन खेमे की स्थिति मजबूत होने का भी संकेत है। एक प्रमुख महिला नेता और एआईसीसी सचिव के तौर पर काम करने वाली केरल की पहली महिला, शनीमोल पार्टी के संगठनात्मक चेहरे के तौर पर हमेशा सुर्खियों में रही हैं।

उनकी जीत से कांग्रेस विधायक दल में महिलाओं का प्रतिनिधित्व फिर से बहाल हुआ है और सतीशन के राजनीतिक जनाधार को भी मजबूती मिली है।

ए. पी. अनिल कुमार

पार्टी: कांग्रेस, विभाग: स्वास्थ्य, निर्वाचन क्षेत्र: वंडूर, आयु: 61, शिक्षा: प्री-डिग्री

कैबिनेट में एपी अनिल कुमार को शामिल किया जाना राज्य कांग्रेस में के.सी. वेणुगोपाल के बढ़ते प्रभाव और यूडीएफ मंत्रालय में जाति तथा क्षेत्रीय समीकरणों के संतुलन को दर्शाता है। वेणुगोपाल के एक भरोसेमंद वफादार और पार्टी में अनुसूचित जाति का एक वरिष्ठ चेहरा होने के नाते अनिल कांग्रेस को मलप्पुरम से भी प्रतिनिधित्व देते हैं।

यह वह क्षेत्र है जहां आईयूएमएल ने कैबिनेट में एक बड़ी जगह बनाई है। ओमन चांडी सरकार में पूर्व मंत्री रहे अनिल 2001 से लगातार कांग्रेस-IUML के समर्थन से वंडूर सीट पर अपना कब्जा बनाए हुए हैं।

एम लिजू

पार्टी: कांग्रेस, पोर्टफोलियो: उत्पाद शुल्क, निर्वाचन क्षेत्र: कायमकुलम, आयु: 46, शिक्षा: एलएलबी

केसी वेणुगोपाल के वफादार लिजू ने मुख्यमंत्री पद की चर्चाओं के दौरान वेणुगोपाल का समर्थन किया था, जिससे कैबिनेट में जगह मिलने की उनकी संभावनाएं और मजबूत हो गईं।

उनके इस पदोन्नति से पार्टी को मंत्रिमंडल में ‘एझवा’ समुदाय का प्रतिनिधित्व बेहतर बनाने में भी मदद मिलती है। पहले विधानसभा चुनाव लड़ने के बावजूद सफलता न मिलने के बाद अब वे कैबिनेट में शामिल युवा चेहरों में से एक के रूप में उभरे हैं।

उनका शामिल होना संगठन के प्रति उनकी वफादारी को दर्शाता है और साथ ही यह नेतृत्व द्वारा विभिन्न समुदायों और पीढ़ियों के बीच संतुलन बनाने के प्रयास को भी प्रतिबिंबित करता है।

शिबू बेबी जॉन

पार्टी: आरएसपी, विभा: कृषि, निर्वाचन क्षेत्र: चावरा, आयु: 62, शिक्षा: बीटेक

शिबू बेबी जॉन और आरएसपी के लिए 2026 का चुनाव यूडीएफ के भीतर अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए बेहद अहम था। चावरा से उनकी जीत ने उनकी और उनकी पार्टी, दोनों की स्थिति को मजबूत किया।

एक व्यवसायी और फिल्म निर्माता शिबू ने इससे पहले दूसरे ओमन चांडी मंत्रिमंडल में श्रम मंत्री के तौर पर कार्य किया था। 2005 में गठित एक अलग गुट—आरएसपी (बेबी जॉन) का कुछ समय तक नेतृत्व करने के बाद वे 2014 में अपनी मूल पार्टी में वापस लौट आए। मंत्रिमंडल में उनकी वापसी एक राजनीतिक पुनरुत्थान का संकेत है।

बिंदु कृष्णा

पार्टी: कांग्रेस, विभाग: महिला एवं बाल कल्याण, निर्वाचन क्षेत्र: कोल्लम, आयु: 53, शिक्षा: एलएलएम

केसी वेणुगोपाल खेमे से जुड़ी एक प्रमुख नेता बिंदु को कैबिनेट में शामिल किए जाने से कैबिनेट में एझवा समुदाय का प्रतिनिधित्व भी मजबूत हुआ है, जो केरल की गठबंधन राजनीति में एक अहम पहलू है। 2011, 2014 और 2021 में हार का सामना करने के बावजूद वह राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस संगठन के भीतर सक्रिय रहीं। 2026 में कोल्लम से 16,830 वोटों के अंतर से उनकी जीत एक अहम कामयाबी साबित हुई।

महिला कांग्रेस, एआईसीसी और केपीसीसी की राजनीतिक मामलों की समिति में काम कर चुकीं बिंदु की यह पदोन्नति संगठन के प्रति उनकी निरंतर लगन को दर्शाता है।

एन समसुद्दीन

पार्टी: आईयूएमएल, पोर्टफोलियो: सामान्य शिक्षा, निर्वाचन क्षेत्र: मन्नारक्कड़, उम्र: 56, शिक्षा: एलएलबी

संसुद्दीन को कैबिनेट में शामिल किया जाना आईयूएमएल द्वारा अनुभव, सांगठनिक संतुलन और जमीनी स्तर पर स्वीकार्यता को दिए जाने वाले महत्व को दर्शाता है। मन्नारक्काड से चार बार विधायक रहे समसुद्दीन ने लगातार जनसंपर्क और लोगों के लिए हमेशा उपलब्ध रहने के जरिए अपने निर्वाचन क्षेत्र में लोगों के साथ एक मजबूत व्यक्तिगत जुड़ाव बनाया है।

पालक्काड से समसुद्दीन को जगह देकर आईयूएमएल ने कैबिनेट में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व भी सुनिश्चित किया है और साथ ही पार्टी के भीतर लगातार चुनावी सफलता और वरिष्ठता रखने वाले एक नेता को पुरस्कृत भी किया है।

केए तुलसी

पार्टी: कांग्रेस, विभाग: एससी/एसटी कल्याण, निर्वाचन क्षेत्र: कोन्गाड, आयु: 52, शिक्षा: एमए, एमफिल

पहली बार विधायक बनीं। उन्होंने सीपीएम के लंबे समय से चले आ रहे गढ़ को जीतकर यूडीएफ की सबसे बड़ी विजेताओं में से एक के तौर पर अपनी पहचान बनाई। उनकी जीत और साथ ही उनके पति और एमपी वीके श्रीकंदन के बढ़ते प्रभाव ने जिले के राजनीतिक समीकरणों को काफी हद तक बदल दिया है।

पिछड़े वर्गों के विकास मंत्री के तौर पर उनकी नियुक्ति को सामाजिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वे खुद पिछड़े समुदाय से आती हैं। उनका यह उभार पलक्कड़ में यूडीएफ को हुए फायदों और कांग्रेस नेतृत्व के व्यापक सामाजिक संतुलन को दर्शाता है।

मोंस जोसेफ

पार्टी: केसी, पोर्टफोलियो: जल संसाधन, सिंचाई, निर्वाचन क्षेत्र: कडुथुरुथी, आयु: 62, शिक्षा: एलएलबी

सात विधायकों के साथ, केरल कांग्रेस (जोसेफ) यूडीएफ में एक महत्वपूर्ण सहयोगी बनी हुई है और मंत्रिमंडल में अधिक मजबूत प्रतिनिधित्व के लिए जोर दे रही है। पार्टी ने दो कैबिनेट पद मांगे थे, यह तर्क देते हुए कि गठबंधन की बातचीत के दौरान उसने कांग्रेस को जगह देने के लिए अपनी सीटें कुर्बान की थीं।

हालांकि, मोंस जोसेफ को शामिल किए जाने से यह संकेत मिलता है कि नेतृत्व एक समझौता फॉर्मूले पर राजी हो जाएगा, जिसके तहत पार्टी को दूसरा कैबिनेट पद मिलने के बजाय ‘चीफ व्हिप’ का पद मिलेगा और इस पद के लिए अप्पू जॉन जोसेफ को नामित किया गया है।

ओजे जनीश

पार्टी: कांग्रेस, पोर्टफोलियो: युवा कल्याण, निर्वाचन क्षेत्र: कोडुंगल्लूर, उम्र: 37, शिक्षा: एलएलबी

कोडुनगल्लूर से पहली बार विधायक बने जनीश केरल में कांग्रेस के एक प्रमुख युवा चेहरे के तौर पर तेजी से उभरे हैं। कानून में स्नातक और पूर्व छात्र कार्यकर्ता रहे जनीश यूथ कांग्रेस में आगे बढ़े और राहुल मामकूटथिल के जाने के बाद 2025 में इसके प्रदेश अध्यक्ष बने।

एआईसीसी के महासचिव केसी वेणुगोपाल के करीबी माने जाने वाले जनीश को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने से कैबिनेट में वेणुगोपाल का प्रभाव भी मजबूत होता है और साथ ही यूडीएफ सरकार में एझवा समुदाय का प्रतिनिधित्व भी सुनिश्चित होता है।

सीपी जॉन

पार्टी: सीपीएम, विभाग: श्रम, निर्वाचन क्षेत्र: तिरुवनंतपुरम, आयु: 68, शिक्षा: एलएलबी

सीपी जॉन का कैबिनेट में शामिल होना एक ऐसे नेता के लिए लंबे समय बाद मिली पहचान के तौर पर देखा जा रहा है जिनका सार्वजनिक और राजनीतिक करियर बहुत लंबा रहा है। कम्युनिस्ट मार्क्सवादी पार्टी के महासचिव के तौर पर उन्होंने वैचारिक मतभेदों के चलते 1986 में एमवी राघवन के साथ सीपीएम छोड़ दी थी।

इन दशकों के दौरान उन्होंने श्रम, कृषि और विकेंद्रीकृत नियोजन के मुद्दों पर एक मुखर आवाज के तौर पर अपनी पहचान बनाई। इसमें राज्य नियोजन बोर्ड में उनकी भूमिका भी शामिल है। विधानसभा चुनाव में जीत के लिए वर्षों इंतजार करने के बाद मंत्री पद मिलना उनके राजनीतिक सफर का एक अहम पड़ाव है।

पीसी विष्णुनाथ

पार्टी: कांग्रेस, विभाग: सहकारिता और संस्कृति, निर्वाचन क्षेत्र: कुंदरा, आयु: 48, शिक्षा: बीकॉम

एआईसीसी के महासचिव केसी वेणुगोपाल के समर्थन से विष्णुनाथ उस युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसे कांग्रेस नेतृत्व नई कैबिनेट के जरिए आगे बढ़ाना चाहता है।

48 वर्षीय विष्णुनाथ ने संगठन में कई अहम भूमिकाएं निभाई हैं, जिनमें केएसयू अध्यक्ष, यूथ कांग्रेस अध्यक्ष, एआईसीसी सचिव और केपीसीसी कार्यकारी अध्यक्ष शामिल हैं। 2006 में चेंगन्नूर से अपने विधानसभा करियर की शुरुआत करने के बाद वे 2021 में कुंडारा चले गए, जहां 2026 में वे 32,564 वोटों के अंतर से दोबारा चुने गए।

पीके बशीर

पार्टी: आईयूएमएल, विभाग: लोक निर्माण, निर्वाचन क्षेत्र: एरानाड, आयु: 66, शिक्षा: एसएसएलसी

बशीर को शामिल किया जाना आईयूएमएल नेतृत्व की उस कोशिश को दिखाता है, जिसके जरिए वह सांगठनिक ताकत, कार्यकर्ताओं की भावना और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन बनाना चाहता है।

एरानाड से चार बार विधायक रह चुके बशीर का जमीनी स्तर पर काफी गहरा असर है। अपनी सुलभ शैली और आम लोगों से सीधे जुड़ाव के कारण, पार्टी के आम कार्यकर्ताओं के बीच भी उन्हें व्यापक स्वीकार्यता हासिल है।

उन्हें शामिल किए जाने की मांग को लेकर सोशल मीडिया पर चलाए गए अभियान ने एक तरफ तो उनके समर्थकों के बीच उनकी लोकप्रियता को जाहिर किया, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर भी इस अभियान ने काफी दबाव बनाया।

अनूप जैकब

पार्टी: केसी (जे), विभाग: खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, निर्वाचन क्षेत्र: पिरावोम, आयु: 48, शिक्षा: बीए, एलएलबी

अनूप की मंत्रिमंडल में वापसी को केरल कांग्रेस (जैकब) की प्रासंगिकता और राज्य में जैकोबाइट चर्च के प्रभाव की मान्यता के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने 2012 में पिरावोम उपचुनाव के जरिए विधानसभा में प्रवेश किया था। यह उपचुनाव उनके पिता टीएम जैकब के निधन के बाद जरूरी हो गया था।

अपने पहले ही कार्यकाल में वे ओमन चांडी मंत्रिमंडल में खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री बन गए। 2016 और 2021 में विधानसभा के लिए दोबारा चुने जाने के बाद अनूप ने यूडीएफ के भीतर अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है।

रोजी एम जॉन

पार्टी: कांग्रेस, विभाग: परिवहन, निर्वाचन क्षेत्र: अंगमाली, आयु: 43, शिक्षा: एमफिल

तीसरी बार विधायक बने रोजी 2021 से 2026 के बीच विधानसभा में विपक्ष की सबसे सक्रिय आवाजों में से एक बनकर उभरे। एनएसयूआई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर वे कांग्रेस के भीतर युवा नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं और संगठन में उनकी पकड़ काफी मज़बूत है।

केसी वेणुगोपाल खेमे के साथ उनके जुड़ाव ने पार्टी के भीतर उनकी स्थिति को और मजबूत किया है। अंगमाली से लगातार मिल रही चुनावी सफलता ने यूडीएफ के नेतृत्व ढांचे में बड़ी भूमिका निभाने की उनकी संभावनाओं को भी बढ़ाया है।

केएम शाजी

पार्टी: आईयूएमएल, विभाग: स्थानीय स्वशासन, निर्वाचन क्षेत्र: वेंगारा, आयु: 55, शिक्षा: बीबीएम

अपने जोशीले भाषणों और जोरदार बोलने के अंदाज के लिए मशहूर शाजी आईयूएमएल के सबसे असरदार भीड़ खींचने वाले नेताओं में से एक बने हुए हैं। भले ही उनकी कुछ टिप्पणियों के सांप्रदायिक लहजे को लेकर विवाद रहे हों।

वेंगारा से उनकी उम्मीदवारी ने पार्टी नेतृत्व के शीर्ष स्तर पर उनके उभरने का संकेत दिया। कोझिकोड के मूल निवासी शाजी को कैबिनेट में शामिल किए जाने का संगठनात्मक महत्व भी है। इससे आईयूएमएल को उस जिले में असंतोष को दूर करने में मदद मिली, जहां पार्टी ने छह सीटें तो जीती थीं, लेकिन शुरुआत में उसे कोई मंत्री पद नहीं मिला था।

वीई अब्दुल गफूर

पार्टी: आईयूएमएल, विभाग: अल्पसंख्यक कल्याण और वक्फ, निर्वाचन क्षेत्र: कलामसेरी, आयु: 49, शिक्षा: एलएलबी

पहली बार विधायक बने अब्दुल गफूर कलामसेरी में सीपीएम नेता और मंत्री पी राजीव को हराकर विधानसभा में प्रवेश किया। उनकी जीत को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसने दक्षिणी केरल में आईयूएमएल की उपस्थिति को मजबूत किया है।

हालांकि मंत्रिमंडल में उनका शामिल होना एक आश्चर्य की बात थी, लेकिन यह पार्टी के क्षेत्रीय विस्तार के प्रयासों को दर्शाता है। उन्होंने 16,312 वोटों के अंतर से जीत हासिल की और अल्पसंख्यकों के समर्थन से आगे बढ़कर एलडीएफ के समर्थक आधार के अन्य वर्गों में भी अपनी पैठ बनाई।

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