पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बीते दो दिनों में बढ़ी तनातनी कम होती दिख रही है। दोनों देशों के बीच तैयार किए गए प्रारंभिक समझौता मसौदे पर सहमति बनने के संकेत मिले हैं और अब अंतिम फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और ईरान के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी पर टिका है।
ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि वह व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ बैठक कर मसौदे पर अंतिम निर्णय लेंगे। हालांकि, उन्होंने ईरानी बंदरगाहों से नौसैनिक नाकेबंदी हटाने के संकेत दिए हैं।
परमाणु मुद्दे पर समझौते से इनकार
हालांकि, ईरान ने अपनी तरफ से ढील न देने के संकेत दिए हैं और परमाणु मुद्दे पर किसी तरह के समझौते से इनकार किया है। ईरान के प्रमुख वार्ताकार एमए गलीबाफ ने कहा है कि अमेरिका को बातें कम और समझौते पर कार्रवाई ज्यादा करनी चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि ईरान को अमेरिका की बातों पर कोई भरोसा नहीं है।
इस बीच, समझौते और होर्मुज स्ट्रेट खुलने की संभावना के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 92 डालर पर पहुंच गईं। उधर, भारत के लिए तय एक तेल टैंकर ने होर्मुज को पार कर लिया है। मार्शल द्वीप का झंडा लगे निसोस केरोस नाम के इस टैंकर पर तीन लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल लदा है और ये तीन जून को विशाखापत्तनम पहुंच सकता है।
परमाणु कार्यक्रम पर औपचारिक वार्ता
आईआरजीसी नौसेना के हवाले से ईरानी न्यूज एजेंसी आईआरएनए ने जानकारी दी है कि बीते 24 घंटे में 23 मालवाहक जहाजों ने होर्मुज स्ट्रेट पार किया है। हालांकि, ये स्पष्ट नहीं है कि इन जहाजों ने टोल दिया है या नहीं।
अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस के अनुसार, प्रस्तावित 60 दिन के प्रारंभिक समझौते में तत्काल युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर औपचारिक वार्ता शुरू करना शामिल है।
तीसरे चरण में 30 से 60 दिनों के भीतर संवर्धित यूरेनियम और अन्य परमाणु गतिविधियों के भविष्य पर बातचीत का खाका तैयार किया जा सकता है। कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस मसौदे पर कई दौर की बातचीत हुई है।
न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर कहा कि ईरान को यह स्वीकार करना होगा कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। यह भी कहा कि होर्मुज को बिना किसी बाधा व टोल के दोनों दिशाओं में जहाजों की आवाजाही के लिए खोला जाना चाहिए।