‘आतंकवाद के खिलाफ दोहरा रवैया बर्दाश्त नहीं’, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मंच पर गरजे अजीत डोभाल…

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर निर्णायक और निष्पक्ष कार्रवाई की जरूरत पर जोर देते हुए कहा है कि इस मुद्दे पर दोहरे मापदंड नहीं अपनाए जा सकते।

उन्होंने कहा कि जिम्मेदार देशों को तय करना होगा कि वे आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों के साथ खड़े होंगे या उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।

रूस में आयोजित पहले अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मंच और सुरक्षा मामलों पर हाई रिप्रेजेंटेटिव्स की 14वीं बैठक को संबोधित करते हुए डोभाल ने कहा कि आतंकवाद आज भी वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी प्रकार की चयनात्मक नीति या दोहरा रवैया स्वीकार्य नहीं हो सकता।

रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु की ओर से आयोजित इस बैठक में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के सामने उभरती चुनौतियों, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और वैश्विक तनाव पर चर्चा हुई। भारतीय दूतावास ने एक्स पर इसकी जानकारी साझा की।

डोभाल ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1945 में बने वैश्विक संस्थानों और सुरक्षा ढांचों में व्यापक सुधार की जरूरत है, ताकि वे मौजूदा दौर की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपट सकें। उन्होंने कहा कि इन सुधारों में “ग्लोबल साउथ” के देशों को अधिक प्रतिनिधित्व और निर्णय प्रक्रिया में पर्याप्त भागीदारी मिलनी चाहिए।

पश्चिम एशिया की स्थिति का उल्लेख करते हुए डोभाल ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।डोभाल ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से सीमा पार और राष्ट्र प्रायोजित आतंकवाद का सामना कर रहा है। उनका संकेत पाकिस्तान में सक्रिय और वहां से समर्थन पाने वाले आतंकी संगठनों की ओर था।

उन्होंने कहा कि भारत ने पहलगाम हमले के दोषियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की है और आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से व्यक्त सख्त रुख का समर्थन करता है।

वैश्विक व्यवस्था पर बोलते हुए डोभाल ने कहा कि दुनिया इस समय लगातार संघर्षों, आर्थिक अनिश्चितताओं, व्यापारिक तनाव और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के कारण गहरे भू-राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता के दौर से गुजर रही है।

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