शादी की रस्मों के दौरान लगाई गई जिस हल्दी से तीन दूल्हों की तबीयत बिगड़ी व एक दुल्हन की मौत हो गई, उसमें आर्सेनिक पाया गया है।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा कराई गई सैंपल की जांच में पता लगा है कि हल्दी को बहुत अधिक चमकीला बनाने के लिए उसमें रंग मिलाया गया था, उस रंग में आर्सेनिक था। इस रंग का प्रयोग होली पर लोगों को लगाने में किया जाता है।
बता दें कि पिछले महीने इंदौर में तीन दूल्हे और खरगोन जिले के कसरावद में दुल्हन की हल्दी की रस्म के बाद तबीयत बिगड़ गई थी। बाद में इलाज के दौरान दुल्हन की मौत हो गई थी।
ऐसे और भी कुछ मामले इन जिलों में सामने आए थे। इसके बाद दोनों जिलों में प्रशासन ने बाजार में बिकने वाली खुली हल्दी और बिना ब्रांड वाले मसालों के सैंपल लेने के निर्देश दिए थे। उन सैंपल की भी रिपोर्ट आनी है।
मामला इंदौर के दुधिया गांव का है
मामला इंदौर के दुधिया गांव का है। यहां के निवासी गोलू कौशल की शादी होने वाली थी। इससे पूर्व हल्दी की रस्म की गई। इसमें हल्दी लगाने के बाद इतनी बिगड़ गई थी कि इलाज के लिए शासकीय एमवाय अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
डॉक्टरों ने गंभीर एलर्जिक रिएक्शन पाया और इसके कारण वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। स्वजन के अनुसार, हल्दी लगाने के कुछ देर बाद ही गोलू को शरीर में जलन, खुजली और सांस लेने में तकलीफ होने लगी।
रस्म के दौरान लगाई गई हल्दी में ये केमिकल मिले थे
डॉक्टरों के अनुसार, त्वचा में रिएक्शन के साथ ही श्वसन तंत्र में भी परेशानी हुई थी। हल्दी में किसी रासायनिक मिलावट की आशंका पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने हल्दी के सैंपल लिए थे। इसकी रिपोर्ट में पाया गया है कि रस्म के दौरान लगाई गई हल्दी में 0.22 एमजी आर्सेनिक, लीड 0.37 और 3.19 एमजी कॉपर था।
चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिल शाह ने बताया कि हालांकि, इतनी कम मात्रा में आर्सेनिक से रिएक्शन के काफी कम मामले होते हैं, लेकिन अधिक मात्रा में प्रयोग से रिएक्शन संभव है।
इससे जलन, लाल चकत्ते, सूजन और एलर्जी जैसी समस्या पैदा हो जाती है। सांस लेने में तकलीफ, उल्टी, कमजोरी और शरीर के अन्य अंगों पर भी असर पड़ सकता है।
रंग का गाढ़ा बनाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल
विशेषज्ञों के अनुसार, त्वचा पर लगाने वाले उत्पादों और खाद्य सामग्री में आर्सेनिक का प्रयोग करना नुकसानदायक है, फिर भी लोग रंगों को चमकीला और गाढ़ा बनाने के लिए अनुचित रूप से इसका प्रयोग करते हैं। हल्दी को अधिक चमकीला बनाने के लिए होली के रंगों में इस्तेमाल होने वाले केमिकल भी मिला दिए जाते हैं।