पर्यावरण कार्यकर्ता भानु तातक पर CBI का शिकंजा, बिना अनुमति विदेशी फंड लेने के आरोप में केस दर्ज…

अरुणाचल प्रदेश की दो पनबिजली परियोजनाओं के खिलाफ काम करने पर सीबीआइ लामबंद हो गई है।

सीबीआई ने वहां के पर्यावरण कार्यकर्ता और वकील भानु तातक के खिलाफ एफसीआरए के तहत बिना पंजीकरण या पूर्व अनुमति के 20.94 लाख रुपये विदेशी फंड प्राप्त करने के आरोप में मामला दर्ज किया है।

केंद्रीय जांच एजेंसी का आरोप है कि इस धन का उपयोग राज्य में दो पनबिजली परियोजनाओं के खिलाफ “प्रदर्शन आयोजित करने और बनाए रखने” के लिए किया गया। भानु तातक की ओर से आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।

दिल्ली में 20 अगस्त को सीबीआई की आर्थिक अपराध-II शाखा द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी में तातक और अज्ञात व्यक्तियों का नाम विदेशी योगदान (नियमन) अधिनियम, 2010 की धाराओं 11(1), 17, 19 और 35 के तहत शामिल किया गया है।

आरोप है कि भानु तातक ने रोइंग के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में एक बचत खाता रखा था और 2022 से 2025 के बीच इस खाते में 20,94,088 रुपये विदेशी मुद्रा लेनदेन के माध्यम से प्राप्त हुए। लेकिन यह रकम गृह मंत्रालय से आवश्यक पूर्व अनुमति प्राप्त किए बिना ही एफसीआरए के हासिल की गई थी।

प्रारंभिक जांच में आरोप लगाया गया कि विदेश से प्राप्त यह फंड “अरुणाचल प्रदेश में सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (एसयूएमपी) और डिबांग मल्टीपर्पज हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट” के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को आयोजित करने और बनाए रखने के लिए उपयोग किए जा रहे थे। जांच में कहा गया कि तातक ने विदेशी संस्थाओं से पैसे प्राप्त किए।

प्राप्त फंड का अधिकांश उपयोग तातक ने कई यूपीआई लेनदेन के माध्यम से किया। लेकिन “फंड प्राप्त करने का उद्देश्य अज्ञात था।”

जांच में आरोप लगाया गया कि तातक, सियांग स्वदेशी किसान फोरम (एसआइएफएफ) की कानूनी सलाहकार व डिबांग प्रतिरोध (डीआर) की समन्वयक ने यह घपला किया।

यह भी आरोप लगाया गया कि तातक ने वित्तीय वर्षों 2017-18 से 2025-26 में आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किए और इसलिए विदेशी संस्थाओं या संगठनों से प्राप्त फंड के संबंध में कोई घोषणा नहीं की।

दस्तावेज में कहा गया, “जांच ने प्रथमदृष्टया यह प्रकट किया कि तातक ने अज्ञात अन्य लोगों के साथ मिलकर, एफसीआरए के प्रविधानों का उल्लंघन करते हुए विदेशी धन प्राप्त किया। गृह मंत्रालय ने कहा कि इस मामले को एफसीआरए की धारा 43 के तहत जांच के लिए सीबीआइ को सौंपा गया है।

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