DRDO की स्वदेशी GaN तकनीक तैयार, अगली पीढ़ी के रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम को मिलेगी नई ताकत…

डीआरडीओ ने हाई-फ्रीक्वेंसी रक्षा प्रणालियों के लिए स्वदेशी गैलियम नाइट्राइड सेमीकंडक्टर (GaN MMIC) तकनीक का सफल परीक्षण किया है। यह उपलब्धि भारत को रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और संचार में आत्मनिर्भर बनाएगी।

यह तकनीक अगली पीढ़ी के रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम को सपोर्ट करेगी। यह जानकारी रक्षा मंत्रालय की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में सामने आई है।

डीआरडीओ ने वर्षों की मेहनत के बाद 2024 में यह गैलियम नाइट्राइड सेमीकंडक्टर एमएमआईसी तकनीक विकसित की। इससे भारत उन सात देशों के चुनिंदा क्लब में शामिल हो गया है, जिनके पास यह तकनीक है। इनमें अमेरिका, रूस, फ्रांस, जर्मनी, दक्षिण कोरिया और चीन शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एक पश्चिमी देश ने बड़े लड़ाकू विमान डील की बातचीत के दौरान भारत को यह तकनीक देने से इनकार कर दिया था।

छोटा चिप्स, बड़ी ताकत

रिपोर्ट में कहा गया है कि 3.5 x 3 मिमी माप का एक स्वदेशी गैलियम नाइट्राइड सेमीकंडक्टर चिप 30 वॉट तक पावर दे सकता है और सिलिकॉन से 300 गुना तेज गति से काम करता है।

एक्स-बैंड तक के अनुप्रयोगों के लिए स्वदेशी गैलियम नाइट्राइड सेमीकंडक्टर एमएमआईसी तकनीक सफलतापूर्वक प्रदर्शित और लागू की गई है।

एस-बैंड गैलियम नाइट्राइड सेमीकंडक्टर हाई इलेक्ट्रॉन-मोबिलिटी पावर बार्स, पावर एम्पलीफायर, लो नॉइज एम्पलीफायर और स्विच एमएमआईसी भी डिजाइन, फैब्रिकेट और प्रदर्शित किए गए हैं।

यह तकनीक रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, संचार, खुफिया, निगरानी, टोही और ड्रोन सिस्टम में उपयोगी है। गैलियम नाइट्राइड सेमीकंडक्टर सामग्री की उत्कृष्ट थर्मल और इलेक्ट्रिकल गुण इसे सेंसर, रडार, सैटेलाइट और मिसाइल जैसे उन्नत रक्षा अनुप्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण बनाती है।

टीम का नेतृत्व

डीआरडीओ के सॉलिड स्टेट फिजिक्स लैबोरेटरी (एसएसपीएल) की निदेशक मीना मिश्रा के नेतृत्व में टीम ने यह उपलब्धि हासिल की। उन्होंने 34 से अधिक वर्षों तक सेमीकंडक्टर रिसर्च में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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