राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट के तहत गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला नहीं दिए जाने का मामला अब गरमाता जा रहा है। भाजपा नेता व रिटायर्ड आईएएस अधिकारी डाॅ. जगमोहन सिंह राजू ने पंजाब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 15 और 16 जुलाई को पंजाब सिविल सचिवालय के सामने दो दिवसीय शांतिपूर्ण अनशन करने का ऐलान किया है। इसके लिए उन्होंने चंडीगढ़ प्रशासन से औपचारिक अनुमति मांगी है।
डॉ. जगमोहन सिंह राजू ने डिप्टी कमिश्नर, चंडीगढ़ को भेजे पत्र में कहा कि पंजाब में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के दौरान आरटीई एक्ट की धारा 12(1)(सी) के तहत एक लाख से अधिक दलित, गरीब और सामाजिक रूप से वंचित बच्चों को प्रवेश से वंचित रखा गया है। उनका कहना है कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि शिक्षा के मौलिक अधिकार का गंभीर उल्लंघन है।
राजू ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों और फैसलों का सबसे अधिक नुकसान उन परिवारों को उठाना पड़ रहा है, जो पहले से आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में हजारों परिवार अपने बच्चों के भविष्य को लेकर असमंजस और चिंता में हैं।
16 जुलाई शाम तक चलेगा अनशन
पत्र के अनुसार प्रस्तावित अनशन 15 जुलाई को सुबह 10 बजे शुरू होगा और 16 जुलाई को शाम 5 बजे समाप्त होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरा कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और अहिंसक रहेगा। साथ ही प्रशासन द्वारा निर्धारित सभी नियमों और शर्तों का पालन किया जाएगा।
अनशन स्थल पर आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए वाटरप्रूफ टेंट, बिजली, कुर्सियां, बेड, पब्लिक एड्रेस सिस्टम और पोर्टेबल टायलेट की अनुमति भी मांगी गई है। डा राजू ने बताया कि किसी भी समय अधिकतम 25 स्वयंसेवक ही अनशन स्थल पर मौजूद रहेंगे, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।
12 घंटे पहले तैयारियों की मांगी अनुमति
उन्होंने यह भी बताया कि वह भारत सरकार के एक्स-लेवल सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समन्वय बनाकर आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए जाने चाहिए। साथ ही उन्होंने कार्यक्रम शुरू होने से 12 घंटे पहले अस्थायी ढांचा खड़ा करने की अनुमति देने का अनुरोध किया है। शिक्षा अधिकार से जुड़े सामाजिक संगठनों और अभिभावकों में भी इस मुद्दे को लेकर नाराजगी बढ़ रही है।