बिहार पुलिस के कारनामे अक्सर चर्चा में रहते हैं, लेकिन भागलपुर जिले की पीरपैंती थाना पुलिस ने जो किया है, उसे सुनकर यमराज भी अपना सिर पकड़ लेंगे। खाकी के अजब-गजब खेल में एक ऐसे शख्स को ‘जिंदा’ कर दिया गया, जिसकी मौत आज से ठीक छह साल पहले हो चुकी है। पुलिस ने न सिर्फ उसे कागजों पर जिंदा किया, बल्कि उस पर मारपीट, जानलेवा हमला और लूटपाट जैसी गंभीर धाराओं में केस भी ठोक दिया।
बिना जांच किए ही मरे हुए व्यक्ति पर दर्ज कर दिया केस
कहते हैं खाकी वालों का हिसाब-किताब बड़ा पक्का होता है, लेकिन पीरपैंती थाने की पुलिस ने ऐसा ब्लंडर (बड़ी गलती) किया है जिससे पूरे महकमे की फजीहत हो रही है। थाना क्षेत्र के अठनियां गांव के रहने वाले 45 वर्षीय केवल यादव की मौत साल 2020 में ही हो चुकी थी। लेकिन पुलिस ने बिना कोई स्थलीय जांच या सत्यापन किए, आंख मूंदकर एक पक्ष के आवेदन पर मरे हुए केवल यादव समेत अन्य लोगों पर एफआईआर (कांड संख्या 230-26) दर्ज कर ली।
केवल यादव की मौत का गम झेल रहे परिवार को लगा बड़ा सदमा
छह साल पहले अपने मुखिया को खो चुके केवल यादव के परिवार को जब इस बात का पता चला, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। जिस इंसान की अर्थी उठे बरसों बीत गए, उसे अचानक पुलिस रिकॉर्ड में गुंडा और लुटेरा बना दिया गया। गांव के ही चुल्हाय यादव नामक व्यक्ति ने दूसरे पक्ष पर केस दर्ज कराया था, जिसमें पुलिस की लापरवाही के कारण मृत केवल यादव को भी मुख्य आरोपियों (मुदालय) की लिस्ट में शामिल कर दिया गया।
इंसाफ के लिए कोर्ट पहुंचे परिजन, वकील ने तैयार किए दस्तावेज
जब इस अजब-गजब एफआईआर की जानकारी इस केस के अन्य नामजद आरोपी चंदन यादव और पीड़ित परिवार को मिली, तो उन्होंने तुरंत कानूनी मदद ली। न्याय की आस में परिजनों ने भागलपुर के जाने-माने अधिवक्ता अमित कुमार से संपर्क साधा। अधिवक्ता ने अब केस की कॉपी और केवल यादव का असली मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) निकालकर न्यायालय में अर्जी देने की कानूनी कवायद शुरू कर दी है, ताकि पुलिस के इस खेल का पर्दाफाश हो सके।
2020 में हुई थी केवल यादव की मृत्यु, 2026 में बने ‘लुटेरे’
सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, 10 अगस्त 2020 को ही केवल यादव की 45 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई थी। लेकिन साल 2026 में वो अचानक पुलिस डायरी में जीवित हो गए। उन पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अन्य लोगों के साथ मिलकर चुल्हाय यादव के घर पर हमला बोला, मारपीट की और गले से सोने की चेन छीन ली। अब पोल खुलने के बाद पीरपैंती थाने की पुलिस बैकफुट पर है और केस से मृत व्यक्ति का नाम हटाने की दस्तावेजी तैयारी में जुट गई है।
सबौर थाने में भी 31 साल पहले मरे व्यक्ति ने दी थी ‘धमकी’
भागलपुर पुलिस का यह कोई पहला कारनामा नहीं है। इसी साल 23 फरवरी 2026 को सबौर थाना क्षेत्र में भी ऐसा ही एक मजेदार लेकिन हैरान करने वाला मामला सामने आया था। वहां एक नाबालिग छात्रा के अपहरण के मामले में लड़की के पिता ने मुख्य आरोपी निशु दास के साथ-साथ उसके पिता बद्री दास को भी नामजद आरोपी बना दिया था। मजे की बात यह है कि बद्री दास की मृत्यु 31 साल पहले, यानी साल 1995 में ही हो चुकी थी।
एसएसपी के आदेश के बाद पुलिस को सुधारनी पड़ी थी अपनी गलती
सबौर वाले मामले में भी पुलिस ने बिना कोई जांच किए वादी के आवेदन पर केस दर्ज कर लिया था, जिसमें मृत बद्री दास पर हत्या करा देने की धमकी का आरोप था। जब मामला मीडिया में उछला, तो भागलपुर के एसएसपी प्रमोद कुमार यादव के सख्त निर्देश पर सबौर थाना पुलिस ने आनन-फानन में जांच कर बद्री दास का नाम केस से हटाया था। अब ठीक वैसा ही वाकया पीरपैंती थाने में दोहराया गया है, जिसने पुलिसिया जांच के तौर-तरीकों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।