केंद्र सरकार ने सीबीएसई में दो भारतीय भाषाओं समेत तीन भाषाएं पढ़ने की अनिवार्यता के विवाद पर फिलहाल विराम लगाते हुए इस सत्र में लाखों छात्र-छात्राओं को छूट प्रदान की है।
सीबीएसई के अधिकारियों ने बताया कि त्रि-भाषा नीति के तहत दो विदेशी भाषाओं का विकल्प चुनने वाले कक्षा सात से कक्षा नौ तक के विद्यार्थियों को कक्षा दस में भी उसी भाषा-संयोजन के साथ पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी जाएगी।
शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि दो भारतीय भाषाओं को पढ़ने की अनिवार्यता कक्षा-छह से लागू की जाएगी। इसलिए इस समय कक्षा-सात, आठ और नौ में पढ़ रहे विद्यार्थियों को तीन भाषाएं पढ़ने के नियम से फिलहाल छूट मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि एक महीने पहले केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने घोषणा की थी कि दो भारतीय भाषाओं समेत तीन भाषाओं का अध्ययन कक्षा-नौ के छात्रों के लिए एक जुलाई से अनिवार्य कर दिया गया है। कई छात्रों और अभिभावकों ने सीबीएसई के आदेश के खिलाफ अदालत का रुख किया था।
बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को कहा, “नई भाषा नीति के तहत कम से कम दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन करने की आवश्यकता कक्षा-छह से लागू होगी और यह पहले से कक्षा सात से नौ में पढ़ाई कर रहे छात्रों पर लागू नहीं होगी। इसकी स्पष्टता के लिए एक आधिकारिक अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी।”
बोर्ड ने मई में कहा था कि जब तक समर्पित आर3 पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो जातीं, कक्षा नौ के छात्रों को चुनी हुई भाषा की कक्षा छह की आर3 पाठ्यपुस्तकें (2026-27 संस्करण) का उपयोग करना होगा।
15 मई को जारी किए गए परिपत्र के अनुसार, जो छात्र विदेशी भाषा का विकल्प चुनते हैं, वे केवल तब ऐसा कर सकते हैं जब उन्होंने दो भारतीय भाषाएं पढ़ी हों या इसे एक अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में चुन सकते हैं।
अप्रैल में सीबीएसई ने कक्षा छह से तीन-भाषा नीति के चरणबद्ध कार्यान्वयन की घोषणा की थी और 2026-27 शैक्षणिक सत्र से कक्षा नौ के लिए गणित और विज्ञान के लिए दो स्तरों की प्रणाली का परिचय दिया था।
गणित और विज्ञान में दो स्तर होंगे
प्रस्तावित संरचना के तहत गणित और विज्ञान में दो स्तर होंगे-अनिवार्य मानक और वैकल्पिक उन्नत पाठ्यक्रम। सभी छात्रों को एक सामान्य 80 अंकों की परीक्षा में बैठना होगा, जबकि उच्च दक्षता का विकल्प चुनने वाले छात्र एक अतिरिक्त उन्नत स्तर का पेपर ले सकते हैं, जिसका उद्देश्य गहरे वैचारिक समझ और उच्च-क्रम के सोच कौशल का परीक्षण करना है।
सीबीएसई ने तब कहा था कि नए दो-स्तरीय प्रणाली (मानक व उन्नत) के तहत पहले कक्षा-10 की बोर्ड परीक्षा 2028 में 2026-27 कक्षा नौ के समूह के लिए आयोजित की जाएगी।