सरकार ने बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए रियायती दर पर प्याज की बिक्री शुरू करने के पहले 10 दिन में 17 शहरों में करीब 4,000 टन बफर प्याज बेचा है। केंद्र सरकार के पास 2026 के लिए भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (एनसीसीएफ) और भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नेफेड) के जरिये 1.21 लाख टन प्याज का बफर भंडार है।
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने बताया कि ये एजेंसियां कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए उत्पादक राज्यों से भंडारित प्याज को थोक में खपत वाले केंद्रों तक पहुंचा रही हैं। इसके लिए समर्पित रेल रैक ‘कांदा एक्सप्रेस’ और ट्रक का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ‘कांदा एक्सप्रेस’ के जरिये दिल्ली और चेन्नई में प्याज की खेप पहुंच चुकी है।
तीसरी खेप अब लादी जा रही है, जिसे आने वाले दिनों में गुवाहाटी भेजा जाएगा। खरे ने कहा, ‘बफर प्याज के वितरण से उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है। कीमतों में थोड़ी गिरावट आई है।’ प्याज 35 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर बेचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि रबी प्याज की फसल, जिसे आमतौर पर साल के बाद के महीनों में बिक्री के लिए भंडारित किया जाता है, बेमौसम बारिश के कारण कटाई के दौरान कुछ नुकसान से प्रभावित हुई।
एनसीसीएफ की प्रबंध निदेशक अनीस जोसेफ चंद्रा ने कहा कि अकेले एनसीसीएफ ने अबतक 1,500 टन बफर प्याज बेचा है। देश में प्याज का औसत खुदरा मूल्य 50.79 रुपये प्रति किलोग्राम रहा, जबकि 28 अगस्त को रियायती बिक्री शुरू किए जाने के समय यह 48.50 रुपये प्रति किलोग्राम था।